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हिंदी न्यूज़ / लाइफस्टाइल / Health Tips: हार्मोनल चेंज इन 3 तरीकों से करता शरीर को इफेक्ट, जानें एक्सपर्ट की राय

Health Tips: हार्मोनल चेंज इन 3 तरीकों से करता शरीर को इफेक्ट, जानें एक्सपर्ट की राय

Health Tips: महिलाओं में हार्मोनल बदलाव होना एक आम बात है, लेकिन इसके कारण होने वाली समस्याएं परेशानी बढ़ा सकती है। आइए जानते हैं कि इसे लेकर हेल्थ एक्सपर्ट क्या कहते हैं।  

Health Tips
Edited By: Shivani Jha | Updated: Jan 6, 2025 10:39

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Health Tips: महिलाओं में हार्मोनल बदलाव दिमाग को प्रभावित कर सकते हैं, जैसे कि मूड खराब होना और तनाव का बढ़ना। ये उतार-चढ़ाव गर्भावस्था, पीरियड्स और मेनोपॉज के दौरान सबसे ज्यादा होता है। एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन दिमाग पर  गहरा प्रभाव डालते हैं, भावनाओं, स्मृति और यहां तक ​​कि मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालते हैं, भावनाओं, स्मृति और यहां तक ​​कि नर्व से जुड़े खतरे को भी प्रभावित करते हैं। मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के न्यूरोसाइंसेज, न्यूरोलॉजी के निदेशक डॉ. ने बताया कि महिलाओं में हार्मोनल बदलाव दिमाग को किस तरह प्रभावित हो सकते हैं?

पीरियड्स

डॉक्टर बताती है कि पीरियड्स हार्मोनल उतार-चढ़ाव का एक समय होता है। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का लेवल पूरे चक्र में हार्मोनल को बढ़ता और घटता है और ये बदलाव आपके दिमाग और मन को को प्रभावित कर सकते हैं। कई महिलाएं एस्ट्रोजन के  लेवल बढ़ने पर फॉलिकुलर फेज के दौरान अधिक तेज और अधिक एनर्जी महसूस करने की रिपोर्ट करती हैं। एस्ट्रोजन में न्यूरोप्रोटेक्टिव प्रभाव होते हैं, जो दिमाग को सपोर्ट करते  हैं और सेरोटोनिन को बढ़ाते हैं, जो मूड से जुड़ा एक न्यूरोट्रांसमीटर है। इसके विपरीत, ल्यूटियल चरण के दौरान जब प्रोजेस्टेरोन चरम पर होता है, तो कुछ महिलाओं को चिड़चिड़ापन और थकान फील होता है। ये भी पढ़े- इन 3 मसालों का पानी गलाएगा पेट की चर्बी, 7 दिनों दिखेगा असर

मेनोपॉज और प्री मेनोपॉज

मेनोपॉज और प्री मेनोपॉज पर महिलाओं के 40 से 50 की उम्र में होती है, प्रजनन के अंत का संकेत देती है और इसकी विशेषता एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के लेवल में तेज गिरावट होता है। इस दौरान हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसके कारण कई महिलाओं को याददाश्त, फोसक करने में समस्या और नींद में परेशानी फील होती है। मेनोपॉज  चिंता, डिप्रेशन और मूड स्विंग के बढ़ावा देता है।

किशोरावस्था के कारण

किशोरावस्था के दौरान, दिमाग एक जरूरी विकास से गुजरता है और एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन में बढ़ावा दिमाग को सर्किट को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जैसे कि एस्ट्रोजन सिनैप्टिक प्लास्टिसिटी को बढ़ाता है, दिमाग के नए कनेक्शन बनाने की क्षमता जो सीखने और याददाश्त के लिए जरूरी होते हैं। हालांकि, ये समय भावनात्मक उथल-पुथल का होता है, क्योंकि ये हार्मोनल बदलाव मूड स्विंग, चिंता और यहां तक कि डिप्रेशन का कारण बन सकती है। ये भी पढ़े- चेहरे पर नजर आते हैं तनाव के ये 3 संकेत, गलती से भी न करें इग्नोर Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पर अमल करने से पहले विशेषज्ञों से राय अवश्य लें। News24 की ओर से जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है।


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