शादी दो लोगों के बीच का कनेक्शन है, जिसे बनाने के लिए लड़की अपना सबकुछ छोड़कर लड़के के घर जाती है. अपनी जिंदगी बसर करती है और रिश्ते को निभाने की कोशिश करती है. यह हर लड़की के लिए आसान नहीं होता, लेकिन इसके बावजूद सालों से यह परंपरा चली आ रही है. हमने कभी नहीं सुना कि कहीं पर लड़का अपना घर छोड़कर लड़की के घर रहने जाता है. मगर हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताएंगे जहां पर शादी करने के बाद लड़के की विदाई करने की परांपरा है. यह सुनने में आपको अजीब लग सकता है, लेकिन मेघायल में लड़के घर जमाई बनकर लड़की के साथ वापस आते हैं और अपनी पूरी जिंदगी बसर करते हैं.
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मेघालय की किस जनजाति की है ये परंपरा
मेघालय में यह परंपरा काफी प्रचलित है, जिसमें लड़के अपने ससुराल पहने आते हैं. बता दें कि यह परंपरा मेघालय की खासी जनजाति से जुड़ी हुई है. इस समुदाय के लोग शादी करते हैं तो बेटियों के बजाय बेटों की विदाई करते हैं. यह मातृसत्तात्मक परंपरा का हिस्सा है, जिसमें घर को चलाने वाली या संपत्ति की हकदार बेटियां होती हैं.
पिता नहीं, बल्कि मां के नाम से चलता है वंश
बच्चों के नाम और उनका सरनेम पिता से जुड़ा हुआ होता है. शादी के बाद वंश पिता के नाम से ही चलता है, जिसे पिता के वंशज कहा जाता है. लेकिन इस समुदाय के लोगों में मां को खास दर्जा दिया जाता है. शादी के बाद वंशज मां के नाम पर चलता है और बच्चों के नाम के आगे मां का सरनेम ही लगता है.
प्रॉपर्टी पर महिला का पहला हक
मेघालय के इस समुदाय के लोगों की महिलाएं घर की मुखिया होती हैं. घर की पूरी जिम्मेदारी भी संभालती हैं और प्रॉपर्टी पर भी पहला हक उनका ही होता है. शादी के बाद अपने पति के साथ-साथ पूरे घर की जिम्मेदारी भी महिलाएं या बेटियां ही संभालती हैं. इसलिए इस समुदाय के लोगों को खास माना जाता है और यह अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है.
शादी के बाद घर जमाई की परंपरा
शादी के बाद अक्सर लड़की ससुराल जाती है और अपने पति की जिम्मेदारी पर पूरा जीवन बसर करती है. मगर मेघालय में ऐसा नहीं होता, क्योंकि यहां पर घर जमाई की पंरपरा काफी प्रचलित है. लोग अपने बेटे को तैयार करते हैं, बेटियां बरात लेकर आती हैं और अपने साथ दुल्हे को लेकर जाती हैं. फिर लड़का लड़की के घर रहता है और अपनी पूरी जिंदगी को गुजारता है.
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