आज के समय में बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी मोटापे का शिकार हो रहे हैं, जो एक चिंताजनक बात है। इसके कई सारे कारण हैं जैसे कि प्रोसेस्ड फूड खाना, मीठा ड्रिंक, स्क्रीन टाइम का बढ़ना, नींद के समय में कमी, टॉक्सिन और कुछ वायरल एक्सपोजर, एंडोक्राइन डिसऑर्डर और बिगड़े हुए आंत माइक्रोबायोटा से जुड़ा हुआ है। बच्चों में आज के समय में मोटापे की दर 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। कई बार ऐसा भी होता है कि माता-पिता अपने कामों में इतने व्यस्त रहते हैं कि वे अपने बच्चे की हेल्थ पर ध्यान नहीं दे पाते, जो सबसे ज्यादा जरूरी है। आइए जानते हैं कि इसे लेकर पीडियाट्रिक्स मणिपाल हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. जानकी बल्लव प्रधान क्या कहती हैं।
बच्चों में मोटापे से होने वाली समस्या
बच्चों में मोटापा सिर्फ आयु वर्ग तक सीमित नहीं है, क्योंकि मोटापे की ट्रैकिंग से पता चला है कि 80 प्रतिशत गंभीर मोटापा वयस्कता में भी बना रहेगा। डॉ. जानकी बल्लव प्रधान बताती हैं कि मोटापा मेटाबॉलिक प्रोग्रामिंग से जुड़ी है, जिसके कारण मेटाबॉलिक विकार अलग-अलग तरह के होते हैं। इस दौरान हार्ट से जुड़ी समस्या, एकैंथोसिस, डिप्रेशन, डायबिटीज और पॉलीसिस्टिक ओवरीज जैसी समस्या बढ़ सकती है।
बच्चों के मोटापे पर ध्यान दें
डॉ. जानकी बल्लव प्रधान कहती हैं कि ये समस्या लाइफ के शुरुआती दौर से, यानी 10 साल से शुरू हो सकती है और इसके लिए समय-समय पर मूल्यांकन की जरूरत होती है। इस समय ब्लड प्रेशर और शुगर चेक करें। इसके अलावा HbA1C, लिपिड प्रोफाइल और स्लीप एपनिया की निगरानी करें। इसके साथ ही समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं। डॉ. जानकी बल्लव प्रधान का कहना है कि वजन घटाने के खेल गतिविधियों में बच्चों को भाग लेने दें। डाइट में हेल्दी फूड खाने के लिए दें, जो आपके बच्चे को पसंद आए।
माता-पिता कैसे करें मदद?
1. परिवार में साथ हेल्दी खाने की आदत डालें।
2. स्क्रीन का कम समय और खाने के दौरान स्क्रीन का बिल्कुल भी इस्तेमाल न करने दें।
3. सोने वाले कमरे में टीवी न लगाएं।
4. ताजी सब्जियां और घर पर बना खाना खाने दें।
5. समय पर सोने की आदत डालें।
6. खेल-कूद के अलावा ध्यान और योग करने के लिए कहें।
Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पर अमल करने से पहले विशेषज्ञों से राय अवश्य लें। News24 की ओर से जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है।