Parenting Tips: बच्चे छोटी उम्र में जो कुछ सीखते हैं वही उसकी आदतें बन जाती हैं. अगर ये आदते अच्छी हों तो बच्चे को जीवन में आगे बढ़ने में और बेहतर इंसान बनने में मदद करती हैं और अगर आदतें बुरी हों तो बच्चे के भविष्य पर बुरा असर डालती हैं. ये आदतें अच्छे कामों से बनती हैं और ये काम बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार आने ही चाहिए. यहां ऐसे ही 10 कामों का जिक्र किया जा रहा जो 10 साल की उम्र से पहले बच्चे (10 Year Old) को जरूर सिखाने चाहिए.

10 साल की उम्र तक बच्चे को सिखाएं ये 10 काम

खुद का हाइजीन मेंटेन करना - बच्चों को अपना हाइजीन मेंटेन करना सिखाएं. खुद नहाना, अपने नाक-कान साफ करना, ब्रश करना और हाथ-पैरों की सफाई करना बच्चे को आना चाहिए.

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अपने लिए कुछ बनाकर खाना - बिना पकने वाला ही सही लेकिन बच्चे को अपने लिए कुछ बनाकर खाना आना चाहिए.

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अपनी बात रखना - 10 साल की उम्र तक बच्चे को अपनी बात रखना आना चाहिए. उसे घबराना नहीं चाहिए बल्कि साफ शब्दों में बताना चाहिए कि उसे क्या चाहिए और क्या नहीं.

जूते बांधना - इस उम्र तक बच्चे को जूते बांधने जैसे कामों के लिए किसी के ऊपर निर्भर नहीं होना चाहिए बल्कि उसे खुद जूते बांधने आने चाहिए.

कपड़े पहनना - बच्चे को कपड़े पहनना आना चाहिए. उसे खासतौर से खुद को स्कूल के लिए तैयार करना आना चाहिए.

फर्स्ट एड आना - बच्चे को प्राथमिक चिकित्सा के बारे में पता होना चाहिए. कभी बच्चे को छोटी-मोटी चोट लग जाए तो उसे घाव को ढकना और साफ कैसे करना है यह पता होना चाहिए.

खुद की नींद को महत्व देना - बच्चों को रात के समय बहुत ज्यादा देर तक नहीं जागना है यह उसे पता होना चाहिए. बच्चे को बताएं कि रात में समय से सोकर वह अनेक बीमारियों से बच सकता है.

कमरे की सफाई करना - 10 साल की उम्र तक बच्चे को घर के छोटे-मोटे काम सिखा देने चाहिए. बच्चे को पता होना चाहिए कि उसे अपना कमरा कैसे साफ करना है.

टाइम मैनेजमेंट - बच्चे को अपना टाइम मैनेज करना आना चाहिए. कब पढ़ना है या कब खेलना है इसका अंदाजा उसे होना चाहिए.

शेयर करना - 10 साल की उम्र तक बच्चे को पता होना चाहिए कि शेयरिंग ही केयरिंग है. बच्चा अपने भाई-बहनों से और दोस्तों से चीजें बांटने को लेकर बहुत ज्यादा जिद्दी ना हो यह सुनिश्चित करना जरूरी है.

इस बात का रखें खास ख्याल

इस बात का ध्यान रखें कि आपको अपने बच्चे को 10 साल की उम्र तक थैंक्यू और सॉरी का महत्व भी सिखाना है. उसे सिखाना है कि किस तरह सभी का सम्मान किया जाता है और किस तरह झूठ और लालच से बचकर रहना है.

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