बच्चों के लंच के लिए क्या नहीं पैक करना चाहिए? डॉक्टर ने बताया बढ़ सकता है बच्चे का ब्लड शुगर लेवल

Bad Lunch For Kids: बच्चे का लंच हेल्दी होना बेहद जरूरी है. लंच हेल्दी ना हो तो बच्चे की सेहत पर तो असर पड़ता ही है, साथ ही उसका क्लास में ध्यान नहीं लगता है वह घर लौटता है तो भूखा और थका हुआ रहता है. ऐसे में डॉक्टर से जानिए बच्चे के लंच में कौन से फूड्स कभी पैक नहीं करने चाहिए.

Lunch

यहां जानिए बच्चे को लंच में कौन सी 3 चीजें कभी नहीं देनी चाहिए.

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Lunch For Kids: बच्चे को स्कूल जाना हो तो उसके लिए लंच पैक किया जाता है. कई बार मां को यह सोचने में भी कंफ्यूजन होती है कि बच्चे को लंच में क्या दिया जाए. इससे होता यह है कि वे उसे हेल्दी फूड्स देने के बजाय हेल्दी लगने वाले अनहेल्दी फूड्स पैक करके दे देती हैं. बच्चे को लंच में सही चीजें नहीं मिलती हैं इसीलिए वह घर लौटता है तो इरिटेटेड होता है, शरीर चिपचिपा और थकान से भरा रहता है. वहीं, गलत चीजों से पेट 2 घंटों के लिए ही भरता है और घर आने तक के समय में बच्चा भूखा ही रहता है जिससे उसका पढ़ाई में भी मन नहीं लगता है. ऐसे में फिजीशियन डॉ. फराह की सलाह है कि बच्चे को सही लंच देना जरूरी है. अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से वीडियो शेयर करके डॉक्टर ने बताया है कि वो कौन सी 3 चीजें हैं जो बच्चे को लंच में कभी नहीं देनी चाहिए.

बच्चे को लंच में क्या नहीं देना चाहिए

डॉक्टर का कहना है कि बच्चे को लंच में कभी भी वाइट ब्रेड सैंडविच, जूस का पैकेट और बिस्कुट पैक करके नहीं देना चाहिए. बहुत से माता-पिता यह गलती कर देते हैं. उन्हें लगता है कि ये चीजें हेल्दी हैं और बच्चे के स्वास्थ्य को अच्छा रखती हैं. लेकिन, असल में ये चीजें बच्चे की सेहत के लिए खराब साबित होती हैं.

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इन फूड्स को खाने पर बच्चे का ब्लड शुगर (Blood Sugar) एकदम से बढ़ जाता है और फिर एकदम से गिरता है. वाइट ब्रेड एनर्जी क्रैश करती है, पैकेट वाले जूस में हिडन शुगर होती है और बिस्कुट खाली कैलोरी. ये फुड्स पहले एनर्जी स्पाइक करते हैं और फिर क्रैश जिस कारण बच्चे का क्लास में मन नहीं लगता, भूख लगने लगती है और स्टैमिना कम होता है. इसीलिए बच्चे को लंच में प्रोटीन वाला सही खाना देना जरूरी है सिर्फ कार्ब्स और शुगर ही नहीं.

लंच में क्या पैक करना चाहिए

बच्चे के लंच में आप रोटी सब्जी के अलावा अंडा, पनीर या चना दे सकते हैं. फलों के जूस के टेटरापैक या बोतल वाला जूस देने के बजाय उसे पूरा फल खाने के लिए दिया जा सकता है. इसके अलावा, स्नैक्स में बिस्कुट के अलावा उसे सूखे मेवे दे सकते हैं. डॉक्टर की सलाह है कि बच्चे को सिंपल घर का खाना ही दें. जरूरी नहीं कि उसे आपको लंच में फैंसी चीजें देकर ही भेजना है. कभी-कभी बिस्कुट या सैंडविच वगैरह दें उसके अलावा हेल्दी चीजों को ज्यादा पैक करें.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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