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नोबेल पुरस्कार विजेताओं को 'लॉरिएट' क्यों कहा जाता है? हजारों साल पुरानी है इस खास उपाधि की कहानी

नोबेल फाउंडेशन के अनुसार, ‘लॉरिएट’ शब्द का मतलब सिर्फ किसी प्रतियोगिता को जीतने वाले व्यक्ति से नहीं है. यह उस व्यक्ति या संस्था के लिए इस्तेमाल होता है, जिसे किसी महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया हो.

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नोबेल पुरस्कार सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं हैं. (Photo: ANI)

दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल नोबेल पुरस्कार का ऐलान होते ही ‘लॉरिएट’ (Laureate) शब्द बार-बार सुनाई देता है . आम तौर पर किसी पुरस्कार को हासिल करने वाले व्यक्ति को विजेता कहा जाता है, लेकिन नोबेल पुरस्कार पाने वालों के लिए आधिकारिक तौर पर ‘नोबेल पुरस्कार लॉरिएट’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं इस खास उपाधि के पीछे की वजह क्या है और इसका संबंध हजारों साल पुराने इतिहास से जुड़ा है.

प्राचीन ग्रीस से जुड़ा है इस उपाधि का इतिहास

आपको बता दें कि ‘लॉरिएट’ शब्द की जड़ें प्राचीन ग्रीस से जुड़ी हुई हैं. यह शब्द ‘लॉरेल’ (Laurel) नाम के पौधे से लिया गया है. प्राचीन ग्रीस में लॉरेल की पत्तियों से मुकुट या माला बनाई जाती थी. इस मुकुट को सम्मान और उपलब्धि का प्रतीक माना जाता था. प्राचीन ग्रीस में खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं के साथ-साथ कविता जैसी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने वालों को भी लॉरेल की माला पहनाकर सम्मानित किया जाता था. उस दौर में यह माला सिर्फ जीत का प्रतीक नहीं थी, बल्कि किसी असाधारण उपलब्धि और सम्मान को दर्शाती थी.

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भगवान अपोलो से भी जुड़ा है लॉरेल

ग्रीक पौराणिक कथाओं में भी लॉरेल का खास महत्व रहा है. प्राचीन ग्रीस के संगीत, कविता और भविष्यवाणी के देवता माने जाने वाले अपोलो को अक्सर सिर पर लॉरेल की माला पहने हुए दिखाया जाता है. यही वजह है कि समय के साथ लॉरेल उपलब्धि, ज्ञान और सम्मान से जुड़ा प्रतीक बन गया. बाद के दौर में ‘लॉरिएट’ शब्द का इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के लिए होने लगा, जिसे किसी असाधारण उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया हो. इसी परंपरा का इस्तेमाल नोबेल पुरस्कार के लिए भी किया जाता है.

‘विजेता’ से अलग क्यों है लॉरिएट?

नोबेल फाउंडेशन के अनुसार, ‘लॉरिएट’ शब्द का मतलब सिर्फ किसी प्रतियोगिता को जीतने वाले व्यक्ति से नहीं है. यह उस व्यक्ति या संस्था के लिए इस्तेमाल होता है, जिसे किसी महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया हो. नोबेल पुरस्कार सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं हैं. कुछ मामलों में यह पुरस्कार संगठनों को भी दिया जाता है. नोबेल फाउंडेशन के आंकड़ों के अनुसार, 1901 से 2025 के बीच नोबेल पुरस्कार 633 बार कुल 1,026 लोगों और संगठनों को दिए जा चुके हैं.

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यह भी पढ़ें: साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार का ऐलान, कैनेडियन कवयित्री ऐनी कार्सन को अनोखे लेखन के लिए मिलेगा अवार्ड

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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