दुनिया में हर साल कई लोग विज्ञान, साहित्य या समाज को नई दिशा देते है. लेकिन किसी व्यक्ति के काम को दुनिया के सबसे मशहूर और बड़े सम्मानों में से एक नोबेल पुरस्कार, कैसे मिलता है? इसके पीछे किसका फैसला होता है और आखिर इस पुरस्कार की शुरुआत क्यों हुई थी? नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) एक अंतरराष्ट्रीय सम्मान है, जो विज्ञान, साहित्य और शांति सहित अलग-अलग क्षेत्रों में मानवता के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों और संगठनों को दिया जाता है. इसकी शुरुआत स्वीडन के वैज्ञानिक और उद्योगपति अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत से हुई थी. आज इसे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में गिना जाता है. नोबेल पुरस्कार सिर्फ एक पदक या सम्मान नहीं है. यह उन लोगों और संगठनों के काम को पहचान देता है, जिन्होंने मानवता के लिए महत्वपूर्ण योगदान किया है.
किसने शुरू किया और नाम नोबेल क्यों पड़ा?
अल्फ्रेड नोबेल का जन्म 1833 में स्वीडन में हुआ था. वह वैज्ञानिक, आविष्कारक और उद्योगपति थे. डायनामाइट के आविष्कार के लिए भी उन्हें जाना जाता है. 27 नवंबर 1895 को उन्होंने अपनी वसीयत में अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा पुरस्कारों के लिए रखने का फैसला किया. उनका मकसद भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और शांति के क्षेत्र में मानवता को लाभ पहुंचाने वाले कामों को सम्मानित करना था. उनके नाम पर ही इन पुरस्कारों को नोबेल पुरस्कार कहा गया. उनकी मृत्यु 1896 में हुई और पहला नोबेल पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर 1901 को आयोजित हुआ. अर्थशास्त्र का पुरस्कार 1969 में स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने शुरू किया था. यह अल्फ्रेड नोबेल की मूल वसीयत में शामिल नहीं था.
कितनी कैटेगरी हैं और कौन चुनता है?
नोबेल फाउंडेशन पुरस्कारों से जुड़ी व्यवस्था और प्रशासन का काम संभालती है, लेकिन सभी विजेताओं का चयन एक ही समिति नहीं करती. हर कैटेगरी के लिए अलग- अलग संस्थाएं हैं.
कैटेगरी और पुरस्कार देने वाली संस्था
| कैटेगरी | पुरस्कार देने वाली संस्था |
|---|---|
| भौतिकी और रसायन विज्ञान | रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज |
| चिकित्सा | करोलिंस्का इंस्टीट्यूट की नोबेल असेंबली |
| साहित्य | स्वीडिश एकेडमी |
| शांति | नॉर्वेजियन नोबेल समिति |
| अर्थशास्त्र | रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज |
उम्मीदवारों को एक्स्पर्ट्स और संस्थाएं नामांकित करती हैं. कोई व्यक्ति खुद को नामांकित नहीं कर सकता. इन संस्थाओं के अंदर संबंधित समितियां उम्मीदवारों के काम की जांच करती हैं, विशेषज्ञों से सलाह लेती हैं और चयन की प्रक्रिया में मदद करती हैं. समिति सिफारिश तैयार करती है और संबंधित पुरस्कार देने वाली संस्था अंतिम फैसला करती है. शांति पुरस्कार में नॉर्वेजियन नोबेल समिति ही विजेता चुनती है. नामांकित लोगों की सूची 50 साल तक सार्वजनिक नहीं की जाती.
नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन कैसे होता है?
हर साल सितंबर में नामांकन की शुरुआत होती है. नोबेल समितियां दुनिया भर के हजारों विशेष विशेषज्ञों, प्रोफेसरों और पिछले विजेताओं को अगले साल के पुरस्कारों के लिए नामांकन भेजने का निमंत्रण देती हैं. नामांकन भेजने की आखिरी तारीख अगले साल की 31 जनवरी (रात 12 बजे तक) होती है. इसके बाद आने वाले नामांकनों को अगले साल के लिए रखा जाता है. फरवरी से सितंबर के बीच नोबेल समितियां नामांकनों की जांच करती हैं. हर साल अक्टूबर की शुरुआत में विजेताओं के नामों की आधिकारिक घोषणा की जाती है.
उम्मीदवारों को चुनने की प्रक्रिया समझिए
सबसे पहले नामांकन की जांच की जाती है फिर सूची में उन उम्मीदवारों पर ध्यान दिया जाता है, जिनका काम संबंधित कैटेगरी के लिए महत्वपूर्ण हो. जरूरत पड़ने पर अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों से उम्मीदवारों के कामों की जांच कराई जाती है. संबंधित समिति कई महीनों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट और सिफारिश पुरस्कार देने वाली संस्था के सामने रखती है. संबंधित संस्था अपने नियमों के अनुसार विजेता चुनती है.
नोबेल पुरस्कार में क्या मिलता है?
नोबेल पुरस्कार जीतने वालों को तीन चीजें दी जाती हैं- एक मेडल, एक डिप्लोमा सर्टिफिकेट और नकद कैश मिलता है. डिप्लोमा सर्टिफिकेट हर विजेता के लिए खास तौर पर तैयार किया जाता है और उसे एक अनोखी कला से बनाया जाता है. नोबेल मेडल 18 कैरेट रिसाइकल्ड सोने से बनाया जाता है, जिस पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई जाती है और इसका वजन लगभग 175 ग्राम होता है. मेडल के साथ मिलने वाला डिप्लोमा सर्टिफिकेट भी नॉर्मल सर्टिफिकेट नहीं होता, बल्कि कलाकारों और पेशेवर कलाकार द्वारा तैयार किया गया खास सम्मान-पत्र होता है. पुरस्कार की राशि 12 मिलियन स्वीडिश क्रोना मिलती है यानी यह लगभग 11.61 करोड़ भारतीय रुपये के बराबर होती है. अगर एक पुरस्कार दो या तीन लोगों को दिया जाता है, तो राशि पुरस्कार के नियमों के तहत बांटी जाती है. एक पुरस्कार अधिकतम तीन व्यक्तियों के बीच साझा किया जा सकता है. एक और दिलचस्प बात यह है कि नोबेल पुरस्कार केवल एक बार मिलने वाला सम्मान नहीं है. कुछ लोगों ने अलग-अलग वर्षों में एक से अधिक बार नोबेल पुरस्कार जीता है.
नोबेल शांति पुरस्कार कैसे मिलता है?
नोबेल शांति पुरस्कार बाकी से अलग है, क्योंकि इसे विज्ञान या साहित्य की उपलब्धियों के बजाय शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में किए गए काम के लिए दिया जाता है. अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में इस पुरस्कार के लिए प्रमुख बाते थीं, जैसे- देशों के बीच दोस्ती बढ़ाना और शांति समझौते कराना. इस पुरस्कार के विजेता को नॉर्वे की पांच सदस्यीय नॉर्वेजियन नोबेल समिति चुनती है. इस समिति के सदस्यों की नियुक्ति नॉर्वे की संसद करती है. बाकी पुरस्कारों के विजेताओं को स्वीडन की संस्थाएं चुनती हैं. शांति पुरस्कार किसी व्यक्ति के साथ-साथ किसी संगठन को भी दिया जा सकता है.
यह भी पढ़ें : भारतीय मूल की नवनेथेम ‘नवी’ पिल्लई को मिला 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार
भारत में किस-किसको मिला है नोबेल पुरस्कार?
भारत से जुड़े प्रमुख विजेताओं में रवींद्रनाथ टैगोर (1913, साहित्य), सी. वी. रमन (1930, भौतिकी), मदर टेरेसा (1979, शांति), अमर्त्य सेन (1998, अर्थशास्त्र) और कैलाश सत्यार्थी (2014, शांति) शामिल हैं. हर गोबिंद खुराना (चिकित्सा), सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर (भौतिकी), वेंकटरमन रामकृष्णन (रसायन विज्ञान) और अभिजीत बनर्जी (अर्थशास्त्र) का जन्म भारत में हुआ था, लेकिन उनकी नागरिकता अलग रही है.
अब तक कितने लोगों को मिला नोबेल पुरस्कार?
नोबेल पुरस्कार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 1901 से 2026 तक कुल 638 बार नोबेल पुरस्कार और अर्थशास्त्र का पुरस्कार दिए गए हैं. इस दौरान 998 अलग-अलग व्यक्तियों और 28 संगठनों को पुरस्कार मिला. कुछ व्यक्तियों को एक से ज्यादा बार पुरस्कार मिला, इसलिए कुल विजेताओं की संख्या और अलग-अलग व्यक्तियों की संख्या में फर्क है.
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