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मंत्री पद से इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान को कितनी मिलेगी पेंशन? जानिए क्या कहते हैं नियम

Dharmendra Pradhan: दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुए आंदोलन के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा. अब कई लोगों के मन में ये सवाल आ रहा है कि मंत्री पद छोड़ने के बाद उन्हें पेंशन मिलेगी या नहीं?

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Dharmendra Pradhan (Photo-X)

How Much Pension Will Dharmendra Pradhan Receive: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 20 जून से शुरू हुए सीजीपी आंदोलन के बाद महीनों तक हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. 25 जुलाई को अपने फैसले का ऐलान करते हुए, प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक ओपन लेटर शेयर किया. इसमें उन्होंने कहा कि छात्रों के हित में और देश-विरोधी तत्वों की तरफ मौजूदा स्थिति का गलत फायदा उठाने से रोकने के लिए उन्होंने पीएम मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया. उनके इस्तीफे के बाद सबसे आम सवालों में से एक ये है कि क्या पद छोड़ने के बाद केंद्रीय मंत्री को कोई अलग पेंशन मिलती है.

अलग से पेंशन नहीं मिलती

संसद के मौजूदा नियमों के तहत, केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले सांसद को मंत्रिपरिषद में सेवा करने के लिए कोई अलग पेंशन नहीं मिलती है. भारत में पूर्व मंत्रियों के लिए कोई खास पेंशन की व्यवस्था नहीं है. इसके बजाय पेंशन के लिए एलिजिबिलिटी एमपी के तौर पर कार्यकाल से तय होती है, न कि उनके मंत्री पद से.

सांसद का पेंशन कैसे कैलकुलेट किया जाता है?

मौजूदा नियमों के मुताबिक, सांसद के तौर पर सेवा करने वाला कोई भी शख्स एमपी न रहने के बाद 31,000 रुपये की बेसिक मंथली पेंशन का हकदार होता है. इसके अलावा, पूर्व सांसद को शुरुआती 5 सालों के बाद संसदीय सेवा के हर एक्सट्रा ईयर के लिए 2,500 रुपये हर महीने मिलते हैं. इसलिए पेंशन का फाइनल अमाउंट संसद में बिताए गए टोटल ईयर पर डिपेंड करता है.

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धर्मेंद्र प्रधान को कितनी पेंशन मिलेगी?

धर्मेंद्र प्रधान ने कई बार पब्लिक रिप्रेजेंटेशन किया है, जिसमें राज्यसभा सदस्य, लोकसभा सदस्य और पहले ओडिशा विधानसभा के सदस्य के तौर पर उनका रोल शामिल है. अगर भविष्य में वो संसद सदस्य नहीं रहते हैं, तो वो पूर्व एमपी पेंशन के हकदार होंगे. ये पेंशन 31,000 रुपये प्रति माह की बेसिक अमाउंट से शुरू होगी, साथ ही नियमों के तहत 5 सालों से ज्यादा की संसदीय सेवा के लिए अर्न किया गया कोई भी एक्सर्ट्रा पेंशन भी इसमें शामिल होंगे.

अगर वो MP बने रहते हैं

केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने का किसी नेता की संसद सदस्यता पर अपने-आप कोई असर नहीं पड़ता है. अगर धर्मेंद्र प्रधान MP के तौर पर सेवा जारी रखते हैं, तो उन्हें उस अवधि के दौरान पूर्व MP पेंशन नहीं मिलेगी. इसके बजाय, उन्हें संसदीय नियमों के अनुसार मौजूदा सांसदों को मिलने वाली सैलरी और भत्ते मिलते रहेंगे. इसलिए, मंत्री पद से हटने और संसद छोड़ने को दो अलग-अलग मामलों के तौर पर देखा जाता है.

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पूर्व सांसदों को मिलने वाले फायदे

महीने की पेंशन के अलावा, योग्य पूर्व सांसदों को रिटायरमेंट के बाद कुछ खास फायदे भी मिलते हैं. इनमें मुफ्त रेल यात्रा शामिल है, जिसके तहत वो एसी फर्स्ट क्लास में ट्रैवल कर सकते हैं, और तय नियमों के मुताबिक उनके साथ एक शख्स एसी टू-टियर में सफर कर सकता है. पूर्व सांसदों को सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) के तहत जीवन भर मेडिकल सुविधाएं भी मिल सकती हैं. ये फैसिलिटीज पूर्व सांसद होने के नाते मिलती हैं, न कि सिर्फ इसलिए कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री के तौर पर काम किया था.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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