पुराने जमाने में जब बिजली और आधुनिक मशीनों का आविष्कार नहीं हुआ था, तब महलों और घरों को ठंडा रखने के लिए ‘विंड कैचर’ तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस सिस्टम की शुरुआत शायद ईरान के यज्द शहर से हुई थी जहाँ इमारतों की छतों पर ऊंची मीनारें या गुंबद बनाए जाते थे. इन संरचनाओं को फारसी में ‘बादगीर’ कहा जाता है जो ऊपर बहने वाली ठंडी हवा को पकड़कर नीचे कमरों तक पहुँचाने का काम करती थीं. हवा ऊपर से नीचे गुजरने के दौरान प्राकृतिक रूप से ठंडी हो जाती थी और पूरे भवन को शीतलता प्रदान करती थी.
भारत में शीतलता के देसी उपाय
भारत के राजस्थान जैसे गर्म इलाकों में राजा-महाराजा अपने महलों को ठंडा रखने के लिए वास्तुकला का बखूबी इस्तेमाल करते थे. जयपुर और जैसलमेर जैसे शहरों में महलों के पास बड़ी-बड़ी बावड़ियों या ‘स्टेप वेल’ का निर्माण कराया जाता था ताकि आसपास का वातावरण ठंडा बना रहे. महलों की दीवारें बहुत मोटी बनाई जाती थीं और उनमें बारीक जालीदार खिड़कियां और झरोखे रखे जाते थे जिनसे हवा का वेंटिलेशन बेहतर रहता था. चूने और पत्थर के इस्तेमाल से बनी ये दीवारें बाहर की भीषण गर्मी को अंदर आने से रोकती थीं जिससे कमरों का तापमान संतुलित रहता था.
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मुगलों और अरब देशों का खास सिस्टम
मुगल बादशाहों के महलों में ठंडक बनाए रखने के लिए बड़े-बड़े गलियारों और कक्षों में पानी से भरे विशाल पात्र रखे जाते थे. जब बाहर की गर्म हवा झरोखों से टकराकर इन जलपात्रों के ऊपर से गुजरती थी, तो वह ठंडी होकर अंदर प्रवेश करती थी. वहीं दुबई जैसे गर्म शहरों में भी यज्द की तकनीक का प्रयोग होता था जिसे वहाँ ‘बरजील’ के नाम से जाना जाता था. ये पवन मीनारें ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा को इमारत के भीतर मोड़ देती थीं और गर्म हवा को ऊपर से बाहर निकाल देती थीं.
आम लोगों के घर और प्राकृतिक तरीके
महलों के अलावा पुराने समय में आम लोगों के घर भी प्रकृति के बहुत करीब और ठंडे होते थे. गांवों में हर घर के आसपास घने पेड़ और पास में दो-तीन तालाब जरूर होते थे जो प्राकृतिक एसी का काम करते थे. घरों की दीवारें अक्सर मिट्टी की बनी होती थीं और छतों पर वेंटिलेशन के लिए पर्याप्त जगह छोड़ी जाती थी. अधिकतर निर्माण में चूना-पत्थर का उपयोग होता था और बड़े खुले आंगन व हवादार बरामदे भीषण गर्मी में भी सुकून देने का काम करते थे. इन प्राचीन और वैज्ञानिक उपायों की मदद से बिना बिजली के भी लोग कड़ी गर्मी को मात दे देते थे.
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