दिवाली को रोशनी का त्योहार कहा जाता है. यह त्योहार सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि कई मुस्लिम बहुल देशों में भी मनाया जाता है. इन देशों में रहने वाले भारतीय और स्थानीय हिंदू समुदाय के लोग अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार दिवाली मनाते हैं. खास बात यह है कि कई जगहों पर मुस्लिम समुदाय के लोग भी इन उत्सवों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं. इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, मलेशिया और पाकिस्तान इसके कुछ उदाहरण हैं. कहीं मंदिरों में खास कार्यक्रम होते हैं, तो कहीं घरों को दीयों और रोशनी से सजाया जाता है. कई जगहों पर अलग-अलग समुदाय के लोग एक साथ मिलकर इस त्योहार की खुशियां मनाते हैं.
इंडोनेशिया
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है. यहां का रामायण से पुराना सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है. देश के बाली, सुमात्रा और जावा द्वीपों पर दिवाली मनाई जाती है. जावा में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल प्रम्बानन मंदिर में रामायण का मंचन भी होता है. इन कार्यक्रमों में मुस्लिम कलाकार भी हिस्सा लेते हैं. कुछ लोग दिवाली के दौरान आत्म संयम और मन की शुद्धि के लिए 30 दिनों का उपवास भी रखते हैं. त्योहार की तैयारियां करीब एक महीने पहले ही शुरू हो जाती हैं. लोग अपने घरों की रंगाई-पुताई करते हैं और उन्हें सजाते हैं. घरों में दीये जलाए जाते हैं. कुछ परिवार रात में देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा भी करते हैं.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
संयुक्त अरब अमीरात, खासकर दुबई में दिवाली बड़े स्तर पर मनाई जाती है. यहां सरकार की ओर से इस मौके पर संगीत कार्यक्रम और कई दूसरे आयोजन किए जाते हैं. दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा को भी दिवाली की शुभकामनाओं और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है. दिवाली के दौरान बाजारों और शॉपिंग मॉल में भी खास रौनक रहती है. सोने के बाजारों और मॉल में ग्राहकों को छूट और कई तरह के ऑफर दिए जाते हैं. लोग सोने के गहने और नए कपड़े खरीदते हैं. भारतीय समुदाय के लोगों के साथ स्थानीय निवासी और पर्यटक भी इन उत्सवों में शामिल होते हैं. लोग मिलकर दीये जलाते हैं, रंगोली बनाते हैं और एक-दूसरे को मिठाइयां बांटते हैं.
सऊदी अरब
सऊदी अरब में पिछले कुछ सालों में हुए सांस्कृतिक बदलावों के बाद त्योहार मनाने के मौके बढ़े हैं. रियाद समेत कई शहरों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग दिवाली मनाते हैं. इस दौरान वे अपने घरों, दुकानों और काम की जगहों को रंग-बिरंगी सजावट और रोशनी से सजाते हैं. परिवार के लोग पारंपरिक कपड़े पहनते हैं, बिंदी लगाते हैं और घरों में देवी लक्ष्मी व भगवान गणेश की पूजा करते हैं. इसके अलावा लोग एक-दूसरे को उपहार देते हैं और दिवाली की शुभकामनाएं देते हैं.
मलेशिया
मलेशिया में दिवाली को ‘हरि दिवाली’ या ‘दीपावली’ कहा जाता है. इस मौके पर पूरे देश में सार्वजनिक छुट्टी होती है. यहां दिवाली मनाने की एक खास परंपरा ‘ओपन हाउस’ है. इसके तहत हिंदू परिवार अपने दोस्तों, पड़ोसियों और दूसरे धर्मों के लोगों को घर बुलाते हैं. मुस्लिम समुदाय के लोग और अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले मेहमान भी इन कार्यक्रमों में शामिल होते हैं. वे घरों में बने पारंपरिक पकवान और मिठाइयों का आनंद लेते हैं. इस तरह दिवाली के मौके पर लोगों को एक-दूसरे के करीब आने और मिल-जुलकर त्योहार मनाने का मौका मिलता है.
पाकिस्तान
पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार दिवाली मनाता है. कराची के स्वामीनारायण मंदिर के अलावा पंजाब और सिंध के कई पुराने मंदिरों को भी इस मौके पर दीयों और रोशनी से सजाया जाता है. दिवाली के दौरान यहां आपसी भाईचारे और सद्भावना का संदेश भी दिया जाता है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और दूसरे राजनीतिक नेता भी हिंदू समुदाय को आधिकारिक तौर पर दिवाली की शुभकामनाएं देते हैं.
हर देश में दिवाली मनाने का अपना तरीका
इन सभी देशों में दिवाली मनाने का तरीका अलग-अलग है. कहीं मंदिरों में खास कार्यक्रम होते हैं, तो कहीं घरों में पूजा-पाठ किया जाता है. दुबई जैसे शहरों में संगीत कार्यक्रम और खरीदारी से जुड़ी रौनक देखने को मिलती है, जबकि मलेशिया में ओपन हाउस की परंपरा लोगों को एक साथ लाती है. हालांकि, इन सभी जगहों पर एक बात समान है. दिवाली के मौके पर अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ आते हैं और त्योहार की खुशियां बांटते हैं. यही वजह है कि दिवाली सिर्फ रोशनी और पूजा का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी मेल-जोल और भाईचारे का भी संदेश देती है.
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