How Cyclone Arnab Got Its Name: चक्रवात ‘अर्नब’ भारत के पूर्वी तट की तरफ तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते ओडिशा और आंध्र प्रदेश ने इसके संभावित असर से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत कर लिया है. इस तूफान के कारण भारी बारिश, तेज हवाएं और बाढ़ आ सकती है, इसलिए प्रभावित होने वाले इलाकों में समय रहते चेतावनी जारी करना और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना बहुत जरूरी है.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान लगाया है कि पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना वेदर सिस्टम 26 अक्टूबर को एक चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा और 28 अक्टूबर की सुबह तक आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ेगा. ओडिशा ने जोखिम को कम करने के लिए अपने संसाधनों को तैनात कर दिया है, जबकि आंध्र प्रदेश ने बिजली कंपनियों को निर्देश दिया है कि वो इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रखें.
चक्रवात ‘अर्नब’ का नाम किसने रखा?
‘अर्नब’ नाम बांग्लादेश की तरफ से सुझाया गया था. ये नाम उस आधिकारिक लिस्ट में शामिल है जिसे अप्रैल 2020 में वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) और यूनाइटेड नेशंस इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (UNESCAP) के ‘ट्रॉपिकल साइक्लोन पैनल’ ने अपनाया था.
यह भी पढ़ें- Cyclone Fengal: चक्रवाती तूफान का नाम ‘फेंगल’ क्यों? कैसे होता है चक्रवात का नामकरण?
इस लिस्ट में 13 देशों के दिए गए नाम शामिल हैं, बांग्लादेश, भारत, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन. हर देश ने 13-13 नाम सुझाए थे, जिससे उत्तरी हिंद महासागर में आने वाले चक्रवातों के लिए कुल 169 नामों की एक लिस्ट तैयार हुई. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में जैसे-जैसे तूफान आते हैं, इस लिस्ट से सीक्वेंस के हिसाब से नाम रखे जाते हैं.
‘अर्नब’ का क्या मतलब है?
‘अर्नब’ शब्द आमतौर पर बंगाली भाषा में ‘महासागर’ या ‘समंदर’ के लिए इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि IMD की ऑफिशियल लिस्ट में बांग्लादेश को इस नाम का प्रस्ताव देने वाला देश बताया गया है, लेकिन वहां इसका कोई खास मतलब नहीं दिया गया है.
चक्रवातों के नाम क्यों रखे जाते हैं?
चक्रवातों का नाम रखने से मौसम से जुड़ी चेतावनियों को लोगों तक पहुंचाना, उन्हें समझना और याद रखना आसान हो जाता है. इससे अधिकारियों, मीडिया संस्थानों और आम जनता को अलग-अलग तूफानों के बीच फर्क करने में मदद मिलती है, खासकर तब जब एक साथ कई वेदर सिस्टम एक्टिव हों. एक तय नाम होने से प्रभावित इलाकों के लोग मौसम के पूर्वानुमान और चेतावनियों को आसानी से समझ सकते हैं, जिससे आपदा की तैयारी और वक्त रहते सुरक्षा उपाय करने में मदद मिलती है.
संबंधित खबरें
सऊदी अरामको पर हमला क्यों अहम? भारत के तेल आयात पर क्या होगा असर
11 days agoK.N. Wanchoo- बिना लॉ डिग्री के भारत के मुख्य न्यायाधीश, क्या ऐसा संभव है?
13 days agoदिल्ली में नए प्रदर्शन स्थल पर कैसे पहुंचा जा सकता है? जानिए पूरी डिटेल
13 days agoगांव की जमीन का पट्टा कैसे मिलेगा? पूरा प्रोसेस आसान भाषा में
13 days agoनोबेल पुरस्कार: इतिहास, चयन प्रक्रिया और भारत के विजेताओं की पूरी कहानी
16 days agoनोबेल पुरस्कार विजेताओं को 'लॉरिएट' क्यों कहा जाता है? दिलचस्प है कहानी
17 days agoRBI के रेपो रेट बढ़ाते ही शेयर बाजार क्यों हुआ धड़ाम? सेंसेक्स 500 अंक टूटा
18 days agoपर्ल हार्बर से ओकिनावा तक, कैसे बदले जापान-अमेरिका के रिश्ते
18 days agoसिलेंडर वापस करने पर मिलेंगे ₹500, बिना लोकल एड्रेस प्रूफ के नया कनेक्शन
19 days agoजंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस ने क्यों हटाई नेम प्लेट? अधिकारियों ने बताई वजह
20 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines