नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने जो तबाही मचाई, उसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया. इस आपदा में अब तक 389 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि 1500 लोग अभी भी लापता हैं. राहत बचाव कार्य में भारत भी नेपाल की मदद कर रहा है, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा ने भारत के भी पहाड़ी क्षेत्रों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. क्या भारत में भी कभी नेपाल जैसी आपदा आ सकती है? ये सवाल आज हर किसी के जेहन में घूम रहा है, आपकी जानकर हैरानी होगी कि हिमालय में मौजूद ऐसी 221 झीलों की पहचान हुई है, जो आने वाले समय में नेपाल जैसी त्रासदी का कारण बन सकती हैं.
24,440 ग्लेशियर झीलों की पहचान की गई
गौरतलब है कि हिमालय में ग्लेशियरों के लगातार पिघलने की वजह से नई ग्लेशियर झीलों का निर्माण और मौजूदा झीलों में पानी बढ़ रहा है. ऐसे में इनके अचानक टूटने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का खतरा बढ़ सकता है. वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के विज्ञानी लितान मोहंती और ऑस्ट्रिया स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रतीक गंतायत की लेटेस्ट रिसर्च में हिमालयी क्षेत्र में कुल 24,440 ग्लेशियर झीलों की पहचान की गई है. इनमें से 221 झीलों को बेहद खतरनाक कैटेगरी में रखा गया है.
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10 हजार से ज्यादा झीलें 0.01 वर्ग किलोमीटर से बड़ी
रिसर्च के मुताबिक, करीब 12,100 सुप्राग्लेशियल झीलें हैं, जो ग्लेशियर की सतह पर बनती हैं. इसके अलावा प्रोग्लेशियल, अपरदन से बनी, चट्टानी बांध वाली और घाटी अवरुद्ध झीलें भी शामिल हैं. कुल झीलों में 10,101 का क्षेत्रफल 0.01 वर्ग किलोमीटर से अधिक है. इनमें से ज्यादातर झीलें 4,500 से 5,500 मीटर की ऊंचाई के बीच स्थित हैं. रिसर्च में पाया गया कि समय के साथ इन झीलों की संख्या और कुल क्षेत्रफल दोनों बढ़ रहे हैं. अलग-अलग क्षेत्रों में झीलों के बढ़ने की दर 17 से 76 प्रतिशत तक दर्ज की गई है. कोसी, यारलुंग जांगबो, मानस, कर्णाली, ऊपरी सिंधु और तीस्ता बेसिन में झीलों के क्षेत्रफल में सबसे ज्यादा बदलाव देखा गया है.
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खतरे के निशान पर कौन-कौन से पहाड़ी क्षेत्र?
कंबाइन्ड हजार्ड मैप (आपदा मानचित्र) में भारत के चेनाब और झेलम बेसिन, चेनाब और ब्यास बेसिन और तीस्ता बेसिन को सबसे ऊपर खतरे वाले निशान पर रखा गया है. नेपाल के कोशी, तामाकोशी और दूधकोशी और भूटान के मानस बेसिन की कुरी चू उप-बेसिन भी खतरनाक इलाकों में रखा गया है.
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