उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (यूपीआईटीएस) वह मंच है जहां योगी सरकार के पिछले वर्षों के काम का रिपोर्ट कार्ड दुनिया के सामने लाइव है. यह दिखाता है कि ‘ब्रांड योगी’ केवल राजनीतिक कड़ाई या भाषणों का नाम नहीं, बल्कि सुशासन, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थानीय कला के सम्मान और वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ता हुआ एक मजबूत आर्थिक मॉडल है. महज एक दशक पहले तक जिस राज्य की पहचान प्रशासनिक सुस्ती, कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और औद्योगिक पिछड़ेपन से होती थी, वही उत्तर प्रदेश आज वैश्विक निवेशकों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए ‘ड्रीम डेस्टिनेशन’ बन चुका है.
जन-कल्याण व कारोबार का अनूठा समन्वय
इस अभूतपूर्व कायाकल्प का सीधा श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विजनरी दूरदर्शिता, सुदृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति और कारोबार व जन-कल्याण अनुकूल नीतियों के अनूठे समन्वय को जाता है. यूपीआईटीएस को नए उत्तर प्रदेश के नए सामर्थ्य का वैश्विक उद्घोष कहा जा सकता है. जहां उत्तर प्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (यूपीजीआईएस) ने दुनिया भर के आर्थिक दिग्गजों को यह संदेश दिया कि यूपी अब केवल एक बाजार नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग व इनोवेशन का सबसे सुरक्षित व उत्पादक केंद्र है, यूपीआईटीएस ने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को एक नया आयाम दिया है. इन दोनों आयोजनों की सफलता के पीछे सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का इन्फ्रास्ट्रक्चर, उद्योग समर्थित नीतियां तथा ‘निवेश मित्र’ व ‘निवेश सारथी’ जैसे पारदर्शी सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम की बड़ी भूमिका है. यूपीआईटीएस में जापान, सिंगापुर, वियतनाम, रूस, ऑस्ट्रिया व बेलारूस जैसे देशों की सक्रिय भागीदारी साबित करती है कि यूपी अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है.
अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक लाभ
किसी भी बड़े निवेश या वैश्विक मेले का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होता है कि उसका लाभ समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं. सीएम योगी आदित्यनाथ के मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह समावेशी और सतत विकास को प्राथमिकता देता है. ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट या इंटरनेशनल ट्रेड शो के माध्यम से आने वाला निवेश केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहकर पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्य यूपी के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुंचा है, जिससे राज्य वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य की ओर तीव्र गति से बढ़ रहा है.
‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना के तहत भदोही के कालीन, फिरोजाबाद के कांच, वाराणसी की सिल्क और मुरादाबाद के पीतल उद्योग को अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले के जरिए विदेशी खरीदार सीधे उपलब्ध हो रहे हैं. करोड़ों के निवेश से बनने वाली नई औद्योगिक इकाइयों, फूड प्रोसेसिंग पार्कों और डेटा सेंटरों से राज्य के लाखों युवाओं को अपने ही घर-गांव के पास प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हो रहा है. इसके साथ ही कृषि आधारित उद्योगों और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल रहा है, जबकि बड़ी वैश्विक कंपनियों के आने से स्थानीय एमएसएमई इकाइयों को सहायक उद्योगों के रूप में बड़े पैमाने पर काम मिल रहा है. इस प्रकार, ग्रेटर नोएडा या लखनऊ में हस्ताक्षरित होने वाला एक एमओयू गांव के एक बुनकर, बढ़ई, कुशल-अकुशल श्रमिक और छोटे व्यवसायी के जीवन स्तर में सुधार का आधार बन रहा है.
मजबूत अर्थव्यवस्था ही जन-कल्याण की नींव
आमतौर पर यह माना जाता है कि जब कोई सरकार कॉरपोरेट निवेश और औद्योगिकीकरण पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित करती है, तो जन-कल्याणकारी योजनाएं और सामाजिक सरोकार पीछे छूट जाते हैं. लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पारंपरिक धारणा को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उन्होंने यह सिद्ध किया है कि एक मजबूत अर्थव्यवस्था ही सुदृढ़ जन-कल्याण की नींव होती है. एक तरफ जहां राज्य सरकार दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नीतियां बना रही है, वहीं दूसरी ओर ‘अन्त्योदय’ की भावना के साथ गरीबों को राशन, आवास, आयुष्मान भारत का सुरक्षा कवच और उज्जवला योजना का लाभ निर्बाध रूप से पहुंचाया जा रहा है.
सीएम योगी का विजन केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं है, वे विरासत और विकास को एक साथ आगे बढ़ा रहे हैं. अयोध्या, काशी और मथुरा के सांस्कृतिक पुनरुद्धार से न केवल पर्यटन में उछाल आया है, बल्कि इसने स्थानीय स्ट्रीट वेंडरों से लेकर होटल उद्योग तक सभी को आर्थिक मजबूती दी है. योगी आदित्यनाथ की पहचान एक ऐसे सख्त और परिणाम-उन्मुख प्रशासक के रूप में बनी है जो समयबद्ध डिलीवरी में विश्वास रखते हैं. नीतियों में निरंतरता और पारदर्शी सुशासन ने उन्हें निवेशकों की नजर में एक विश्वसनीय ब्रांड बना दिया है.
उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट केवल व्यापारिक आंकड़े जुटाने के आयोजन नहीं हैं, ये उस संकल्प के प्रतीक हैं जिसने यूपी की पुरानी छवि को सदा के लिए बदल दिया है. आज उत्तर प्रदेश न केवल भारत के विकास की धुरी बन रहा है, बल्कि वैश्विक निवेश मानचित्र पर एक अनिवार्य गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुका है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने निर्णायक नेतृत्व, पारदर्शी नीतियों और कठोर प्रशासनिक नियंत्रण से यह साबित कर दिया है कि जब इरादे स्पष्ट हों, तो किसी भी राज्य की नियति बदली जा सकती है. ‘ब्रांड योगी’ आज कड़े सुशासन, तेज गति से विकास और सर्वसमावेशी कल्याण का पर्याय बन चुका है- एक ऐसा मॉडल जिसकी चर्चा न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर के नीति-निर्धारकों के बीच हो रही है.
डॉ. पवन जायसवाल
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