पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए एक अहम फैसला लिया है. विद्यालय शिक्षा निदेशालय (प्राथमिक) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को शिक्षकों की युक्तिसंगत समूह (रैशनलाइजेशन) व्यवस्था लागू करने के निर्देश जारी किए हैं. इसका मकसद छात्रों की संख्या में बदलाव के कारण पैदा हो रही शिक्षकों की कमी और अधिकता की समस्या को दूर करना है.
सरकार ने साफ किया है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या प्रवासन, दाखिले, तबादले और जनसंख्या बदलाव जैसे कारणों से घटती-बढ़ती रहती है. इसी वजह से कई स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हैं, जबकि कुछ स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है. ई-पंजाब पोर्टल के आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्थिति सामने आई है.
नई व्यवस्था के तहत डीईओ को शैक्षणिक सत्र के दौरान शिक्षकों की तैनाती को संतुलित करने का अधिकार दिया गया है. इसकी समीक्षा हर तीन महीने में होगी और इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजनी होगी. छात्र-शिक्षक अनुपात भी तय कर दिया गया है. उदाहरण के तौर पर, 1 से 20 छात्रों वाले स्कूल में एक शिक्षक, 21 से 60 छात्रों पर दो शिक्षक और इसी तरह छात्रों की संख्या बढ़ने पर शिक्षक भी बढ़ेंगे.
सरकार ने दूरदराज और पिछड़े ग्रामीण इलाकों के स्कूलों को प्राथमिकता देने का फैसला लिया है, ताकि वहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो. अतिरिक्त शिक्षकों को जरूरतमंद स्कूलों में भेजा जाएगा, लेकिन वरिष्ठता और शिक्षकों की सहमति का पूरा ध्यान रखा जाएगा.
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की सोच के अनुसार यह फैसला बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने और शिक्षकों को कम से कम परेशानी देने के लिए लिया गया है. यह कदम पंजाब में शिक्षा सुधार की दिशा में एक मजबूत पहल माना जा रहा है.










