प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सांसदों के साथ नाश्ता कोई नई परंपरा नहीं है. हर संसदीय सत्र में ऐसी बैठकें होती रही हैं. लेकिन इस बार की मुलाकात कई बड़े आंदोलन , विपक्षी विरोध के बीच पैदा हुई राजनीतिक नाराजगी के लिहाज से ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसे विश्वास बहाली के तौर पर देखा जा रहा है.
भरोसे की राजनीति
तीसरे कार्यकाल में भाजपा अपने दम पर बहुमत में नहीं है. ऐसे में एनडीए में हाल ही में शामिल हुए सांसदों से प्रधानमंत्री का खुद मिलना इस बात का संकेत है कि सरकार सहयोगियों को सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि गठबंधन की ताकत मानकर चल रही है.
‘हम आपके साथ हैं’ का संदेश
प्रधानमंत्री ने नए सहयोगी सांसदों को यह भरोसा देने की कोशिश की है कि उन्हें सरकार और गठबंधन में पूरा सम्मान मिलेगा. एक सांसद वाले दल को भी बराबर महत्व देने की बात इसी राजनीतिक संदेश का हिस्सा माना जा रहा है.
संसद का संदेश, विपक्ष पर निशाना
बैठक में संसद बार-बार बाधित होने पर प्रधानमंत्री ने चिंता जताई. इससे सरकार ने एक बार फिर “कामकाज बनाम हंगामा” का राजनीतिक नैरेटिव आगे बढ़ाने की कोशिश की. साथ ही यह भी कहा गया कि हंगामे से नए सांसदों को बोलने का अवसर नहीं मिल रहा.
PMO तक सीधी पहुंच
सांसदों से कहा गया कि विकास कार्यों में कोई दिक्कत हो तो सीधे PMO से संपर्क करें. इसका राजनीतिक संदेश साफ है—नए सहयोगियों को यह भरोसा दिलाना कि केंद्र सरकार उनके साथ खड़ी है और विकास कार्यों में पूरी मदद करेगी.
महाराष्ट्र पर खास फोकस
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी अपने सांसदों के साथ प्रधानमंत्री से एक घंटे से अधिक समय तक मिले. उद्धव ठाकरे गुट को छोड़कर शिवसेना में आए सांसदों से प्रधानमंत्री ने अलग से बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि न तो व्यक्तिगत स्तर पर और न ही अपने संसदीय क्षेत्र के विकास में उन्हें किसी तरह की परेशानी आने दी जाएगी.
सहयोगियों से व्यक्तिगत जुड़ाव
प्रधानमंत्री ने सांसदों से व्यक्तिगत बातचीत की. पार्थ पँवार का हालचाल पूछा और अन्य सांसदों से भी व्यक्तिगत स्तर पर संवाद किया. इससे यह संदेश गया कि नए सहयोगियों को सिर्फ राजनीतिक रूप से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी जोड़ा जा रहा है.
राजनीतिक संदेश क्या है?
राजनीतिक हलकों में इस पूरी कवायद को NDA 3.0 के “विश्वास बहाली अभियान” के तौर पर देखा जा रहा है. हाल के महीनों में एनडीए का कुनबा बढ़ा है और कई नए सांसद पहली बार इस गठबंधन का हिस्सा बने हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री खुद सक्रिय होकर यह संदेश देना चाहते हैं कि गठबंधन का हर सहयोगी महत्वपूर्ण है और सरकार का शीर्ष नेतृत्व उसके साथ खड़ा है.
यह सिर्फ संसदीय शिष्टाचार वाली बैठक नहीं थी. इसके जरिए तीन बड़े राजनीतिक संदेश देने की कोशिश दिखी—
- NDA में नए सहयोगियों का सम्मान और भरोसा कायम है.
- सरकार गठबंधन को मजबूत और एकजुट रखने के लिए शीर्ष स्तर पर सक्रिय है.
- तीसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री खुद गठबंधन प्रबंधन (Coalition Management) की कमान संभालते नजर आ रहे हैं.
यानी, यह सिर्फ नाश्ते की बैठक नहीं, बल्कि NDA 3.0 की राजनीति को मजबूत करने और सहयोगियों को भरोसा देने का स्पष्ट राजनीतिक संदेश था.
संबंधित खबरें
NMIA से बस, टैक्सी और फ्री शटल की सुविधा शुरू; पुणे का किराया मात्र ₹450
11 days agoफाइल स्टेट से एल्गोरिदमिक स्टेट तक, भारत में डिजिटल शासन का बदलता दौर
12 days agoअदाणी ग्रुप हर साल 10,000 को देगा ट्रेनिंग, भुज में ग्रीन एनर्जी सेंटर शुरू
13 days agoजातिवाद बनाम योगी का समावेशी विकास
14 days agoरणबीर और एन चंद्रशेखरन ने लॉन्च की गुरुदेवश्री राकेशजी की बायोग्राफी Beyond
16 days agoयूपीआईटीएस: नया आर्थिक भूगोल गढ़ता उत्तर प्रदेश
16 days agoअनंत अंबानी न्यूकैसल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस नियुक्त
18 days agoअदाणी ग्रुप के धामरा पोर्ट ने रचा इतिहास, देश का पहला मल्टीकार्गो पोर्ट
20 days agoयूपीआईटीएस: दुनिया के सामने योगी का रिपोर्ट कार्ड
21 days agoभारतीय सोशल ऐप की चार देशों में पहुंच, फीड पर यूजर का कंट्रोल
21 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines