भारत और इंडोनेशिया के लगभग 2,000 वर्ष पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्ते अब नई रणनीतिक साझेदारी में बदलते दिखाई दे रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया यात्रा के दौरान रक्षा, समुद्री सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष, खनिज, डिजिटल व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और सांस्कृतिक विरासत सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के संबंध अब केवल संस्कृति और व्यापार तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और साझा विकास के मजबूत आधार बन रहे हैं.
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इंडोनेशिया ने पाकिस्तान का समर्थन किया था. आज वही देश भारत का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार बन चुका है और रक्षा से लेकर तकनीक तक कई क्षेत्रों में भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है.
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “बिंटांग आदिपूर्णा” से सम्मानित किया गया. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने अपने भारतीय मूल का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि साझा इतिहास और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित हैं.
रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई मजबूती मिली है. इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र मिसाइल खरीदने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों के निर्माण, तकनीक के आदान-प्रदान और इंडोनेशियाई सैन्य अधिकारियों को भारत के रक्षा प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण देने पर भी सहमति जताई है.
समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देश सबांग बंदरगाह के विकास, तटरक्षक बलों के बीच सहयोग और हिंद महासागर में सुरक्षित समुद्री व्यापार को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे.
खनिज क्षेत्र में भारत और इंडोनेशिया के बीच दुर्लभ खनिज, निकेल और इस्पात से जुड़ी आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए समझौता हुआ है. इससे दोनों देशों के उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है.
डिजिटल क्षेत्र में भी सहयोग का दायरा बढ़ाया गया है. दोनों देश भारत की डिजिटल सार्वजनिक व्यवस्था, भुगतान प्रणाली और इंडोनेशिया की भुगतान व्यवस्था को जोड़ने की दिशा में काम करेंगे. इसके अलावा संचार व्यवस्था, नई पीढ़ी की डिजिटल तकनीक, उन्नत कंप्यूटिंग और नवाचार के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा. इससे भारत के नवाचार और नए उद्यमों को भी प्रोत्साहन मिलेगा.
अंतरिक्ष के क्षेत्र में उपग्रह तकनीक, दूरसंवेदी तकनीक और संयुक्त अनुसंधान पर सहयोग बढ़ेगा. शिक्षा के क्षेत्र में इंडोनेशिया के सिंगहासारी में भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु का पहला विदेशी परिसर स्थापित किया जाएगा. वहीं चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में भारत इंडोनेशिया को इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली विकसित करने और चुनावी तकनीक साझा करने में सहयोग करेगा.
स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत इंडोनेशिया को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण तथा छात्रवृत्ति कार्यक्रम चलाने में सहयोग करेगा. इसके साथ ही भारत की मध्याह्न भोजन योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अनुभव भी साझा किए जाएंगे. कृषि क्षेत्र में भारत इंडोनेशिया को 100 टन उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के बीज उपलब्ध कराएगा.
आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देशों ने समय रहते चेतावनी देने वाली व्यवस्था, राहत एवं बचाव कार्यों और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने का निर्णय लिया है.
साझी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए भारत इंडोनेशिया के विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन हिंदू मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार में सहयोग करेगा. रामायण, महाभारत, संस्कृत, गरुड़ और बाली जैसी सांस्कृतिक परंपराएं आज भी दोनों देशों को एक मजबूत सूत्र में बांधे हुए हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल कई समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और साझा विकास की भारत की व्यापक सोच को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम है. यह यात्रा इस बात का भी प्रमाण है कि भारत और इंडोनेशिया अपने प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को आधुनिक रणनीतिक साझेदारी में बदलते हुए भविष्य की नई इबारत लिख रहे हैं.
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