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चुनावी मौसम में अराजकता का मॉडल

पूर्व DGP और राज्यसभा सांसद बृज लाल ने अपने लेख में समाजवादी पार्टी पर कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा को लेकर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने 2011 के मैनाठेर कांड का भी जिक्र किया.

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बृज लाल का सपा पर हमला, मैनाठेर कांड का किया जिक्र

अभी गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर संत कबीरनगर के सपा सांसद ने सड़क पर अपनी गाड़ी फंसाकर निषाद समाज की आस्था को आहत किया. वह तैश में अभद्र तरीके से बोले- “कहां धर्म-कर्म के चक्कर में पड़े हो”. इससे निषाद समाज भड़क गया, जिसका बदला उत्तर प्रदेश का निषाद समाज समाजवादी पार्टी को अगले चुनाव में पटकनी देकर लेगा. इसी तरह रायबरेली में एक सपा नेता पुलिस अधिकारियों से भिड़ गया और ‘औक़ात में रहने’, ‘चूड़ियां पहन लो’ जैसी भाषा का इस्तेमाल किया. पुलिस ने समझदारी से काम किया अन्यथा ये सपाई तो मारपीट पर उतारू थे. इसके बाद यही लोग “विक्टिम कार्ड” खेलकर पुलिस के ख़िलाफ़ धरना देने लगे.

दरअसल, जैसे ही चुनाव नजदीक आता है, समाजवादी नेताओं की गुंडागर्दी एकाएक बढ़ जाती है. मैं प्रदेशवासियों को याद दिलाना चाहूंगा कि इसी प्रकार जब 2012 का चुनाव नजदीक आ गया था, 6 जुलाई 2011 को मुरादाबाद के थाना मैनाठेर के अंतर्गत एक मुस्लिम बेटी ने एक मुस्लिम व्यक्ति के ख़िलाफ़ थाने पर उसके साथ बलात्कार के प्रयास की रिपोर्ट लिखाई. इंस्पेक्टर मैनाठेर ने तुरंत आरोपी के घर दबिश दी. इस पर सपा समर्थक मुस्लिम समाज के लोगों ने पूर्व निर्धारित योजना के तहत क़ुरान की बेअदबी का फर्जी आरोप लगाकर पुलिस कर्मियों पर हमला कर दिया. अराजकता की यह हद रही कि थाना चौकी, पुलिस/पीएसी की गाड़ियों में आग लगा दी गई और पुलिसकर्मियों की रायफलें भी लूट ली गईं.

तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह इसकी सूचना मिलते ही जिलाधिकारी के साथ मौके पर पहुंचे. लेकिन, भारी संख्या में सपा समर्थक मुसलमानों ने डीआईजी/डीएम पर भी हमला बोल दिया, जमकर पथराव किया गया और फायरिंग भी की गई. डीएम मौके से भाग निकले और साथ में पुलिस-एस्कॉर्ट भी ले गए. डीआईजी अशोक कुमार सिंह और उनके पीआरओ सब इंस्पेक्टर रवि कुमार अकेले पड़ गए. बचने के लिए ये दोनों पास स्थित एक पेट्रोल पंप के कमरे में घुस गए. भीड़ ने वहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा और दोनों को बुरी तरह मारा-पीटा गया. आखिरकार, जब दोनों अचेत हो गए तो भीड़ उन्हें मरा समझकर चली गई.

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थोड़ी देर में इंस्पेक्ट केएसपी कुमार कुछ जवानों को लेकर वहां पहुंचे और घायल अधिकारियों को अस्पताल पहुंचाया. डीआईजी का कई वर्षों तक इलाज चला और उन्हें कई ऑपरेशन से गुजरना पड़ा. सालों तक वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सके. इस मामले में पुलिस और पीएसी अधिकारियों द्वारा 6 मुकदमें लिखाए गए. लेकिन, जैसे ही अखिलेश यादव 2012 में मुख्यमंत्री बने, उन्होंने 5 मुकदमों में अपने चहेते पुलिस अधिकारियों से फाइनल रिपोर्ट लगवा दी. तत्कालीन डीआईजी (अब डीजी) अशोक कुमार सिंह और पीआरओ रवि कुमार पर जानलेवा हमला, पिस्टल-कारतूस छीनने, आतंक मचाने, आगजनी करने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने जैसे गंभीर आरोपों में दर्ज मुकदमे में चार्ज-शीट लगाई गई. लेकिन, अखिलेश यादव ने उस गंभीर मुकदमे को भी वापस ले लिया. उनकी नजर में एक सीनियर आईपीएस अधिकारी और सब-इंस्पेक्टर की जान की कोई कीमत नहीं थी. जाहिर है कि ये आक्रामक घटना पार्टी के शीर्ष स्तर पर नियोजित की गई थी.

मुरादाबाद सत्र न्यायालय ने समाजवादी पार्टी की सरकार के मुकदमा वापसी के फैसले पर रोक लगा दी और प्रदेश में बीजेपी सरकार आने पर न्यायालय में इसका ट्रायल शुरू हुआ. वर्ष 2025 में 16 दंगाइयों को सत्र न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा मिली. अगर 2017 में समाजवादी सरकार बन गई होती तो तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह और सब-इंस्पेक्टर रवि कुमार को कभी न्याय नहीं मिलता. यह इससे भी स्पष्ट होता है कि हिंसा व आगजनी के बीच डीआईजी को छोड़कर भागने वाले पुलिस कर्मियों को विभागीय कार्रवाई के बाद बर्खास्त कर दिया गया था, लेकिन अखिलेश जी ने सत्ता में आते ही उन्हें दोबारा सेवा में लेकर पुरस्कृत किया और मनचाहे जिलों गाजियाबाद, नोएडा, इटावा में पोस्टिंग भी दी. डीआईजी को छोड़कर पुलिस एस्कॉर्ट सहित भागने वाले आईएएस अधिकारी को तो अखिलेश यादव ने लखनऊ का डीएम बनाया.

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मैं प्रदेशवासियों से कहना चाहूंगा कि समाजवादी पार्टी के ये गुंडे आने वाले दिनों में इसी प्रकार की गंभीर आपराधिक घटनाएं कराएंगे. सांप्रदायिक, जातीय दंगे करा कर समाज को बांटकर अपनी पार्टी के पक्ष में ध्रुवीकरण करेंगे और बीजेपी पर झूठा आरोप लगाएंगे. ये गलती से सत्ता में आ गए तो प्रदेश में पुनः जंगल-राज होगा. जमीनों पर कब्जे, रंगदारी, व्यापारियों से वसूली, खुलेआम गोकशी, लूटमार, रोज़ाना दंगा-फ़साद शुरू हो जाएगा. मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा होगी, जिसका ख़ामियाज़ा बहुसंख्यक हिंदू भुगतेंगे. विकास रुक जाएगा, गुंडे-मवाली माननीय बनकर उत्पात मचाएंगे. अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, विजय मिश्रा जैसे शातिर अपराधियों का समानांतर शासन कौन भूल सकता है. वक्त बेहद चौकन्ना और सावधान रहने का है.

बृज लाल, पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं राज्यसभा सांसद

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