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धर्मेंद्र प्रधान राजनीति छोड़ेंगे या मुख्यमंत्री बनेंगे? सियासी गलियारों में 3 अटकलों से खलबली, पूर्व शिक्षा मंत्री के लिए क्या हैं विकल्प‌?

केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान के लिए क्या विकल्प हैं? वे ओडिशा की संबलपुर सीट से लोकसभा सांसद हैं और ओडिशा के सियासी गलियारों में उनके मुख्यमंत्री बनने की चर्चा है. इसके लिए समर्थन और खाली होने वाली सीटों को लेकर तर्क दिए जा रहे हैं.

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धर्मेंद्र प्रधान में विरोध के चलते गत 25 जुलाई को ही पद से इस्तीफा दिया है.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक भविष्य क्या है? सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है और अटकलों ने खलबली मचाई हुई है. हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों को अब उनका राजनीतिक भविष्य धूमिल होता नजर आ रहा है, बावजूद इसके भाजपा के सियासी गलियारों में उन्हें लेकर खूब चर्चा हो रही है. हो सकता है कि धर्मेंद्र प्रधान राजनीति से कुछ समय के लिए निष्क्रिय रहें. हो सकता है कि भाजपा उन्हें संगठन में कोई पद दे. एक अटकल उनके मुख्यमंत्री बनने की लगी है, हालांकि विशेषज्ञ इससे इनकार करते हैं, लेकिन समीकरण और समर्थन तो इशारा कर रहे हैं.

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ओडिशा की राजनीति में धर्मेंद्र प्रधान बड़ी ताकत

इंडिया टूडे की रिपोर्ट के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य को लेकर चल रही अटकलें ओडिशा का ‘मुख्यमंत्री’ बनने की इसलिए हैं, क्योंकि बेशक ओडिशा में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल का प्रभुत्व है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान ने ABVP नेता से लेकर ओडिशा में भाजपा संगठन के प्रमुख वास्तुकारों में से एक बनने तक का सफर तय किया है. हालांकि धर्मेंद्र प्रधान लंबे समय से नई दिल्ली में हैं. वे पहले साल 2004 से सांसद और 2014 से केंद्रीय मंत्री रहे. धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा की राजनीति में बड़ी ताकत हैं. उनको ओडिशा में 79 में से 40 भाजपा विधायकों का समर्थन प्राप्त है.

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ओडिशा में धर्मेंद्र प्रधान का संगठनात्मक प्रभाव आज भी काफी मजबूत है. ओडिशा भाजपा धर्मेंद्र प्रधान के चुनाव लड़ने के लिए खाली होने वाली विधानसभा सीटों पर चर्चा कर चुकी है. वह सीट बरगढ़ लोकसभा क्षेत्र की झारसुगुड़ा हो सकती है. भाजपा नेतृत्व भी लंबे समय में ओडिशा में धर्मेंद्र प्रधान को सत्ता में देखना चाहता है, हालांकि तत्काल ओडिशा में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना नहीं है, लेकिन भविष्य में ऐसा हो सकता है, ऐसी चर्चा सियासी गलियारों में है. क्योंकि दिल्ली में राजनीति करके धर्मेंद्र प्रधान अनुभवी हो गए हैं, लेकिन वर्तमान में माहौल उनके खिलाफ है, इसलिए फायदा होता नजर नहीं आ रहा.

धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत में बड़ा राजनीतिक संदेश

शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार बतौर सांसद ओडिशा पहुंचे, जहां भुवनेश्वर में एयरपोर्ट पर उनका शानदार स्वागत हुआ. उन्हें लेने के लिए मोहन चरण मांझी के नेतृत्व वाली सरकार के 16 मंत्रियों में से 4 और पार्टी के 21 विधायक एयरपोर्ट पहुंचे. इस स्वागत ने प्रदेश की सियासत को एक राजनीतिक संदेश दिया कि ओडिशा भाजपा में धर्मेंद्र प्रधान का कद अभी भी बेहद अहम और मजबूत है. भुवनेश्वर में उनके भव्य स्वागत ने ही उनके ओडिशा का मुख्यमंत्री बनने की अटकलों को फिर से हवा दी कि क्या भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक धर्मेंद्र प्रधान मुख्यमंत्री बनेंगे?

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इन अटकलों ने मुख्यमंत्री पद के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची में धर्मेंद्र प्रधान के नाम की एंट्री ने ओडिशा के राजनीतिक हलकों में कुछ लोगों को चिंतित कर दिया है. लेकिन इस मामले में भाजपा हाईकमान का फैसला ही सर्वोपरि और मान्य होगा.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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