भारत में त्योहारों का सीजन शुरू हो गया है और लोगों की हररोज की जरूरत की चीज चीनी के रेट बेलगाम बढ़ते जा रहे हैं. महंगी होती चीनी ने जहां लोगों का स्वाद बिगाड़ दिया है, वहीं देश की सियासत उबल रही है. सियासी गलियारों में चर्चा है कि सरकार ने एथेनॉल बनाने में चीनी का इस्तेमाल हुआ, जिस वजह से चीनी की कमी हुई और इसके रेट बढ़ गए. जिस गति से रेट बढ़ रहे हैं, उससे लगता है कि इस बार त्योहार फीके रह सकते हैं. विपक्ष को भी एक और मुद्दा मिल गया है. क्योंकि चीनी के साथ ही गुड़ भी महंगा होने लगा है, इस बीच केंद्रीय मंत्री का एक बयान आया है.
चीनी के रेट महंगे होने के क्या कारण हैं?
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने केंद्र सरकार की ओर से बताया कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है, लेकिन चीनी महंगी होने के 2 बड़े कारण हैं. एक वजह रेड रॉट बीमारी और दूसरी वजह एल नीनो है. इन दोनों परिस्थितियों के कारण चीनी के उत्पादन में गिरावट आई. भारत ही नहीं दुनियाभर में चीनी का उत्पादन प्रभावित हुआ है. लोगों को ही नहीं, सरकार को भी चीनी के बढ़ते रेटों की चिंता है, इसलिए केंद्र सरकार ने कई एहतियाती कदम उठाए हैं. भारत को 280 लाख टन चीनी की जरूरत है और पर्याप्त सरप्लस चीनी का स्टॉक है तो ज्यादा समय तक लोगों को महंगाई से नहीं जूझना पड़ेगा.
इथेनॉल में चीनी के इस्तेमाल पर क्या बोले?
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि विपक्ष आरोप लगा रहा है कि इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल किया जा रहा है, इसलिए चीनी का उत्पादन कम हुआ और रेट बढ़े. ऐसा कुछ नहीं हैं, विपक्ष के आरोप सरासर झूठे हैं. चीनी के रेट बढ़ने के पीछे इथेनॉल का कोई हाथ नहीं है. त्योहारों में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और खुदरा कीमतों में गिरावट को लेकर केंद्र सरकार कई एहतियाती कदम उठा रही है. कच्ची चीनी का अस्थायी आयात करने का फैसला भी सरकार ने किया है. विपक्ष को तो मुद्दा चाहिए, सरकार पर उंगली उठाने का, सच्चाई से तो उन्होंने वाकिफ होना ही नहीं होता.
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क्या देश में चीनी की भारी कमी होने वाली?
रिपोर्ट के अनुसार, वेदर पैटर्न एल नीनो से चीनी के उत्पादन को खतरा है और भारत ही नहीं पूरी दुनिया में चीनी की कमी होने की आशंका है. इसलिए भारत और दुनियाभर में चीनी की सप्लाई प्रभावित हुई है. एल नीनो गन्ना उत्पादक देशों में गन्ने की फसल को प्रभावित कर रहा है. इसलिए वैश्विक चीनी उत्पादन पर असर पड़ रहा है.
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