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वेणुगोपाल को कॉल करना भी नहीं आया काम, नंदीग्राम सीट पर दिया था ममता ने 'ऑफर'? कांग्रेस ने ठुकराया; जानिए इनसाइड स्टोरी

नंदीग्राम सीट पर अब दिलचस्प मुकाबला बन चुका है. टीएमसी ने नए चेहरे संचिता प्रधान (डे), वहीं भाजपा ने मुख्यमंत्री के दिवंगत पीएम की मां हासिरानी रथ को मैदान में उतारा है.

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सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने खुद दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से संपर्क साधा था . (Image - ANI)

पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है. प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने दावा किया है कि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क किया था और नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने का प्रस्ताव रखा था. हालांकि, टीएमसी ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए किसी भी तरह के चुनावी प्रस्ताव से इनकार किया है.

प्रदीप भट्टाचार्य के मुताबिक, चुनाव तारीखों के ऐलान से करीब 15 दिन पहले टीएमसी ने दिल्ली में सीनियर कांग्रेस नेताओं से संपर्क साधा था. टीएमसी की ओर से कहा गया था कि नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारे, जबकि मुर्शिदाबाद जिले की मुस्लिम बहुल रेजीनगर सीट पर कांग्रेस टीएमसी का समर्थन करें.

यह भी पढ़ें : ममता के 17 बागी सांसदों को लेने से BJP ने क्यों किया इनकार, क्या बोले शमिक भट्टाचार्य?

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इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है, कि ममता बनर्जी ने खुद दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से संपर्क साधा था और केसी वेणुगोपाल से फोन पर बात की थी. पार्टी आलाकमान ने इस पर राज्य इकाई से राय मांगी थी, लेकिन बंगाल कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं ने एकसुर में टीएमसी से किसी भी तरह के चुनावी समझौते का कड़ा विरोध किया था.

कांग्रेस ने क्यों ठुकराया ‘ऑफर’?

प्रदेश कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि इस समय टीएमसी के साथ जाना आत्मघाती कदम होगा. नेताओं का कहना है कि सत्ता गंवाने के बाद टीएमसी विधायकों और सांसदों की बगावत के चलते पार्टी बिखर रही है. कई इलाकों में टीएमसी कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं. कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जब टीएमसी सत्ता में थी, तब उसने कभी कांग्रेस को तवज्जो नहीं दी और उसके नेताओं को तोड़कर कमजोर किया. अब जब टीएमसी कमजोर हो रही है, तो कांग्रेस को भाजपा विरोधी और अल्पसंख्यक वोटों के लिए स्वाभाविक विकल्प बनना चाहिए, न कि ममता को राजनीतिक ऑक्सीजन देनी चाहिए.

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दूसरी ओर, टीएमसी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया.

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नंदीग्राम सीट दिलचस्प मुकाबला

नंदीग्राम सीट पर अब दिलचस्प मुकाबला बन चुका है. टीएमसी ने नए चेहरे संचिता प्रधान (डे), वहीं भाजपा ने मुख्यमंत्री के दिवंगत पीए की मां हासिरानी रथ को मैदान में उतारा है. इनके अलावा कांग्रेस ने मिलन प्रधान को टिकट दिया है तो TMC के बागी गुट ने मोहम्मद एहतशामुल हक उम्मीदवार बनाया है.

यह भी पढ़ें : बंगाल उपचुनाव के लिए BJP ने नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर किया उम्मीदवारों का ऐलान

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नंदीग्राम की सियासी अहमियत

नंदीग्राम वही जगह है जहां से 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने वाममोर्चे की 34 साल पुरानी सत्ता की जड़ें हिला दी थीं और 2011 में ममता बनर्जी सत्ता के शीर्ष पर पहुंची थीं. 2021 के विधानसभा चुनाव में मौजूदा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को यहां 1956 वोटों से हराया था. इसके बाद 2026 के चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी उम्मीदवार को 9665 मतों से शिकस्त दी. हालांकि, शुभेंदु ने भवानीपुर सीट बरकरार रखते हुए नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद भी यह उपचुनाव कराना पड़ रहा है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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