तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने चेन्नई से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज कर दी है. सुपरस्टार विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) अपने पहले ही चुनाव में 105 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. इस जबरदस्त प्रदर्शन ने राज्य में दशकों से चले आ रहे DMK और AIADMK के द्विध्रुवीय वर्चस्व को हिलाकर रख दिया है. लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि क्या विजय और AIADMK साथ आएंगे? क्योंकि 69 सीटों पर बढ़त के साथ AIADMK दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनती दिख रही है. (तमिलनाडु चुनाव के नतीजे लाइव देखें)
क्यों उठने लगा सवाल?
तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों में से टीवीके ने 110 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. वहीं, दूसरे नंबर पर 62 सीटों पर बढ़त के साथ एआईडीएमके है. तीसरे नंबर पर 60 सीटों के साथ डीएमके है. अगर ये रुझान के आंकड़े ही नतीजों में तब्दील होते हैं तो कोई भी पार्टी बहुमत का आंकड़ा छूटे हुए नहीं दिख रही है. तमिलनाडु में बहुमत का आंकड़ा 118 है. ऐसे में टीवीके को सरकार बनाने के लिए एआईडीएमके का साथ चाहिए होगा.
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पुराने जख्म और नई मजबूरी
रुझानों के बाद गठबंधन की चर्चाएं तो शुरू हो गई हैं, लेकिन यह राह इतनी आसान नहीं है. दरअसल, चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच गठबंधन की बातचीत बुरी तरह विफल रही थी. विजय की पार्टी TVK ने गठबंधन के लिए सीएम पद और करीब आधी सीटों मांग रखी थी. लेकिन कई बार राज्य की सत्ता संभाल चुकी AIADMK एक नई पार्टी की ये शर्तें मानने से इनकार कर दिया था. बातचीत टूटने के बाद दोनों तरफ से एक-दूसरे पर जमकर निजी और राजनीतिक हमले किए गए थे.
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गठबंधन की बातचीत टूटने के बाद AIADMK वापस BJP के नेतृत्व वाले NDA की तरफ झुक गई, जबकि TVK ने सभी 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया.
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क्या फिर खिलेगा गठबंधन का फूल?
भले ही दोनों पार्टियों ने चुनाव पूर्व किसी भी समझौते से साफ इनकार कर दिया था, लेकिन खंडित जनादेश की स्थिति में समीकरण बदल सकते हैं. अगर किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो 105 से ज्यादा सीटों वाला विजय का ब्लॉक 'किंग' की भूमिका में आ जाएगा. सत्ता के करीब पहुंचने के लिए AIADMK को विजय को एक समान शक्ति केंद्र के रूप में स्वीकार करना पड़ सकता है. विजय, जिन्होंने अब तक AIADMK-BJP धुरी से दूरी बनाए रखी थी, उन्हें भी अपने स्टैंड में बड़ा बदलाव करना होगा.
विजय का बढ़ता कद
महज दो साल पुरानी पार्टी के साथ विजय ने खुद को राज्य की राजनीति के टॉप गियर में पहुंचा दिया है. रुझान बताते हैं कि भले ही उनके पास पूर्ण बहुमत न हो, लेकिन सरकार वही बनाते दिख रहे हैं.