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बंद कमरे में जातिवादी टिप्पणी सार्वजनिक अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

Supreme Court Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चारदीवारी के भीतर बिना जनता की मौजूदगी के की गई कथित जातिवादी टिप्पणी ‘सार्वजनिक दृश्य’ में नहीं आती. कोर्ट ने इस आधार पर स्कूल प्रबंधक के खिलाफ SC/ST एक्ट की कार्यवाही को रद्द कर दिया. हालांकि, अन्य धाराओं में दर्ज मामले की सुनवाई जारी रहेगी.

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Credit- News 24 GFX

Supreme Court Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी बंद कमरे या चारदीवारी के भीतर की गई कथित जातिवादी टिप्पणी को ‘सार्वजनिक दृश्य’ में किया गया अपराध नहीं माना जा सकता. इसके अलावा अभियोजन पक्ष प्रथम दृष्टया भी यह साबित नहीं कर सका कि घटना ऐसी जगह पर हुई थी जहां लोग इसे देख या सुन सकते थे. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए एक स्कूल प्रबंधक के खिलाफ SC/ST, 1989 के तहत चल रही कार्यवाही को रद्द कर दिया. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल प्रबंधक के खिलाफ कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यह अपील सुप्रीम कोर्ट पहुंची.

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पूरा मामला छात्रों के आपसी विवाद से जुड़ा था. शिकायतकर्ता के दो बेटे संबंधित स्कूल में पढ़ते थे. विवाद के बाद शिकायतकर्ता स्कूल पहुंचा, जहां आरोप के अनुसार प्रबंधक और कर्मचारियों ने उसके साथ मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं. वहीं स्कूल प्रबंधक की पत्नी ने भी शिकायतकर्ता के खिलाफ क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई थी.

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इसके बाद, प्रबंधक ने हस्तक्षेप किया और उन पर भी हमला किया गया. इस एफआईआर में भी स्थानीय अदालत ने आरोप पत्र स्वीकार कर स्कूल प्रबंधक के खिलाफ समन जारी किया. प्रबंधक ने इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हालांकि, हाईकोर्ट ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था कि केवल प्रतिशोध की भावना का आरोप लगाकर कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती और प्रथम दृष्टया मामला बनता दिखता है.

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इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने कानून के तकनीकी और कानूनी पहलुओं की बारीकी से समीक्षा की. SC/ST अधिनियम की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराध के लिए यह जरूरी है कि अपमानजनक टिप्पणी सार्वजनिक दृश्य के भीतर की गई हो. सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले फैसलों का हवाला देते हुए समझाया कि ‘सार्वजनिक दृश्य’ का मतलब ऐसी जगह से है जहां आम जनता मौजूद हो और आरोपी द्वारा कहे गए शब्दों को सुन या देख सके. इसके उलट, किसी बंद कमरे में हुई घटना, जहां बाहर का कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, वह इस श्रेणी में नहीं आती.

मामले की जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल के शिक्षकों ने झगड़े और कहासुनी की बात तो स्वीकार की, लेकिन किसी भी गवाह ने यह नहीं कहा कि उसने जातिसूचक गालियां सुनीं या वह उस समय मौजूद था. इस आधार पर अदालत ने SC/ST एक्ट के तहत राहत दी, हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि IPC के तहत दर्ज अन्य अपराधों पर कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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