हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Nana PatekarGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

'मर्दों से ज्यादा काम करती हैं महिलाएं...', मैटरनिटी लीव पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाएं पुरुषों से ज्यादा काम करती हैं और गोद लेने वाली महिलाओं को मैटरनिटी लीव से वंचित करना गलत है. कोर्ट ने पुराने नियम को असंवैधानिक बताते हुए बड़ा फैसला सुनाया.

विज्ञापन
Credit: Social Media

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महिलाओं के हक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि गोद लिए गए बच्चों की मां को भी 12 हफ्तों की छुट्टी मिलना अनिवार्य है, फिर चाहे बच्चे की उम्र कितनी भी हो. इस दौरान कोर्ट ने ये कहा है कि कामकाजी महिलाएं औसतन पुरुषों की तुलना में ज्यादा घंटे काम करती हैं. दरअसल, एक कानूनी नियम में ये कहा गया था कि सिर्फ वही महिलाएं मैटरनिटी लीव की हकदार होंगी, जो तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लें. सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया और कहा कि ये नियम भेदभावपूर्ण है.

ये भी पढ़ें: दिल्ली HC ने केजरीवाल, सिसोदिया को पक्ष रखने के लिए दिया समय, CBI की याचिका पर हुई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने और क्या कहा?

कोर्ट ने साफ कहा कि मां बनने का अधिकार सिर्फ बायोलॉजिकल तक सीमित नहीं है. गोद लेने वाली महिलाओं भी समान रूप से बच्चे की देखभाल करती हैं और उन्हें भी मैटरनिटी लीव का पूरा अधिकार मिलना चाहिए. इस दौरान कोर्ट ने ये भी कहा कि बच्चे की उम्र के आधार पर मैटरनिटी लीव देने से इनकार करना सही नहीं है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के काम के बोझ पर भी अहम टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि महिलाएं ऑफिस के काम के अलावा घर और परिवार की जिम्मेदारियां भी निभाती हैं, जिससे उनके कुल काम का समय पुरुषों से ज्यादा हो जाता है. इस तरह महिलाओं के अनपेड काम को भी मान्यता देना जरूरी है.

विज्ञापन

ये महिलाओं की गरिमा से जुड़ा है- SC

कोर्ट ने यह भी दोहराया कि मैटरनिटी लीव सिर्फ एक सुविधा नहीं बल्कि महिलाओं का अधिकार है, जो उनकी गरिमा, समानता और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है. इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में मैटरनिटी लीव को संवैधानिक अधिकार बता चुका है. इस फैसले को कामकाजी महिलाओं के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है. खासकर उन महिलाओं के लिए जो गोद लेकर मां बनती हैं, अब उन्हें भी बराबरी का दर्जा और सुविधाएं मिलेंगी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये फैसला ना सिर्फ महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा, बल्कि समाज में समानता और न्याय को भी बढ़ावा देगा.

ये भी पढ़ें: ‘कानून बनाया तो कोई महिलाओं को नौकरी नहीं देगा’, पेड पीरियड लीव पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इंकार

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola