सुप्रीम कोर्ट ने प्रेमी जोड़ों के घर से भागने और सहमति से संबंध बनाने पर अहम टिप्पणी की है। प्रेमी जोड़ों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के दुरुपयोग पर भी चिंता जताई। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने टिप्पणी की है कि प्यार करने वाले युवक-युवती को घर से भागने पर कैसे रोका जा सकता है? प्रेमी जोड़े के भागने पर अकसर माता-पिता अपनी ‘इज्जत’ का हवाला देकर आपराधिक कार्रवाई कराते हैं तो पुलिस वाले पॉक्सो एक्ट के तहत केस क्यों दर्ज कर देते हैं?
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नाबालिगों की निजता के अधिकार का मामला
पॉक्सो एक्ट बच्चों के यौन उत्पीड़न और शोषण के खिलाफ कार्रवाई के लिए बनाया गया है, प्रेमी जोड़ों के भागने के खिलाफ इसके तहत कार्रवाई नहीं हो सकती। नाबालिगों के निजता के अधिकार से जड़े एक मामले में स्वत: संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और कहा कि 15 से 18 साल की उम्र बेहद संवेदनशील होती है। यह उम्र प्रयोग करने की उम्र है तो ऐसे में उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई वास्तव में बनती है? पुलिस को खुद ऐसे मामलों में आत्म चिंतन करना चाहिए।
हाई कोर्ट के विवादास्पद फैसले से जुड़ा केस
कोलकाता हाई कोर्ट ने साल 2023 में एक विवादास्पद फैसला दिया था कि लड़कियों से रिश्तों में उलझने के बजाय लड़कों को अपनी यौन इच्छाओं पर ‘नियंत्रण’ रखना चाहिए। हाई कोर्ट के इस फैसले को साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। साथ ही नाबालिगों के निजता के अधिकार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था। मामले की शुरुआत नाबालिग लड़की और 25 वर्षीय पुरुष के भागने से हुई थी। पीड़ित युवती ने पुलिस शिकायत को निजता के अधिकार का हनन बताया।
सुप्रीम कोर्ट के पुलिस की वर्किंग पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए सवाल उठाया कि क्या पुलिस को अपहरण की शिकायत दी गई थी? क्या पुलिस को यौन शोषण की शिकायत दी गई थी? पीड़िता अगर अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती थी और उनका एक बच्चा भी है और अगर शिकायत यौन शोषण या अपहरण की नहीं है तो पॉक्सो का मामला कैसे बना? 16 से 18 की उम्र में किशोर आपस में संबंध बनाते हैं और शादी न होने पर घर से चले जाते हैं।’ माता-पिता अपनी इज्जत बचाने के लिए उन्हें आपराधी बना देते हैं।
कानून के दुरुपयोग को रोकने पर जोर दिया
सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि पॉक्सो एक्ट और कानून के दुरुपयोग को रोकने की जरूरत है। आपसी सहमति से बने रिश्तों को पॉक्सो एक्ट के तहत जेल पहुंचा दिया जाता है, जो युवक-युवतियों के साथ अन्याय है। नाबालिग आपसी सहमति से संबंध साल 2012 से पहले भी बनाते रहे हैं, जब शारीरिक संबंध बनाने के लिए ‘सहमति की उम्र’ 16 से बढ़ाकर 18 वर्ष की गई थी।
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