हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

शिवसेना शिंदे या शिवसेना ठाकरे… कौन है 'असली पार्टी'? सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला, जानें क्या है विवाद?

Shiv Sena Shinde vs Shiv Sena Thackeray

विज्ञापन
शिवसेना के दोनों गुटों के बीच विवाद पार्टी के सिंबल को लेकर है.

महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच छिड़े ‘असली-नकली’ के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. बीते दिन चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और वी. मोहन की बेंच ने उद्धव ठाकरे की याचिका पर सुनवाई की. उद्धव ठाकरे ने फरवरी 2023 में चुनाव आयोग (ECI) के द्वारा दिए गए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. भारतीय चुनाव आयोग ने विधायी बहुमत यानी विधायकों और सांसदों की संख्या के आधार पर एकनाथ शिंदे के गुट को ‘असली शिवसेना’ करार दिया और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न उन्हें आवंटित कर दिया. इस फैसले के खिलाफ याचिका पर सुनवाई शुरू हुई है.

क्या अध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगे उद्धव ठाकरे? पार्टी में बगावत और टूट से हुए भावुक, जानें क्या बोले शिवसेना UBT प्रमुख

कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दी हैं ये दलीलें

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि विधायकों और सांसदों का बहुमत मायने नहीं रखता, बल्कि ‘मूल राजनीतिक दल’ की इच्छा और उसका संविधान महत्वपूर्ण है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ‘असली-नकली’ का फैसला करेगा. उद्धव ठाकरे की ओर से कपिल सिब्बल ने बेंच के सामने दलील दी कि चुनाव आयोग ने शिवसेना के संविधान की अनदेखी करके फैसला सुनाया. जबकि बेसिक सवाल यह है कि क्या राजनीतिक पार्टी पर केवल विधायी दल का नियंत्रण होता है. अगर विधायक चुनाव के बाद पार्टी से अलग होकर किसी अन्य दल के साथ गठबंधन कर लें, तो यह महाराष्ट्र के मतदाताओं के जनादेश के साथ अन्याय होगा.

विज्ञापन

चुनाव चिह्न राजनीतिक दल का होने की दलील

कपिल सिब्बल ने दलील दी कि एक दल के विधायकों-सांसदों का दूसरे दल को जॉइन कर लेना देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है और इससे जनता के द्वारा चुनी गई सरकार का स्वरूप बदल जाता है. दलील के जवाब में बागची ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को राजनीतिक फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया है कि फैसला लेते समय राजनीतिक दलों के संविधान और नियमों का पालन करना होगा. कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव चिह्न राजनीतिक दल का ही होता है, न कि विधायी दल के नेता का होता है. चुनाव आयोग पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर शिवसेना के संविधान की वैधता पर फैसला लिया, इसलिए चुनाव आयोग के फैसले के रद्द किया जाए.

‘क्या राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे साथ आएंगे’, दशहरा रैली में शिवसेना UBT ने कसा BJP पर तंज

विज्ञापन

शिवसेना शिंदे-शिवसेना ठाकरे में क्या है विवाद?

बता दें कि शिवसेना शिंदे और शिवसेना ठाकरे के बीच पार्टी के नाम, मूल विचारधारा और उसके चुनाव चिह्न को लेकर विवाद है. विवाद की शुरुआत जून 2022 में हुई थी, जब एकनाथ शिंदे ने विधायकों के साथ मिलकर उस समय के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत की थी. इसके बाद शिवसेना की विचारधारा को लेकर टकराव शुरू हुआ और एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी गठबंधन के साथ मिल गए हैं. बगावत होने के चलते उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और एकनाथ शिंदे ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली.

अब एकनाद शिंदे का दावा है कि क्योंकि विधायकों और सांसदों का बहुमत उनके साथ है तो उनकी शिवसेना असली है, वहीं उद्धव ठाकरे का दावा है कि पार्टी का मूल संगठन और संविधान उनके साथ है, इसलिए उनकी शिवसेना असली पार्टी है.

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola