राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय प्रांत प्रचारक बैठक 10 से 12 जुलाई तक कर्नाटक के बेलगावी में होने जा रही है. संघ के शताब्दी वर्ष के बीच आयोजित इस अहम बैठक में संगठन की गतिविधियों और भविष्य की रणनीति के साथ-साथ कुछ ऐसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है, जिनका असर सीधे संगठन और बीजेपी दोनों की छवि पर पड़ा है.

सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद और देशभर में सामने आए पेपर लीक व परीक्षा अनियमितताओं के मामलों पर बैठक में गंभीर मंथन हो सकता है. दोनों ही मुद्दों ने जनता, खासकर युवाओं के बीच चिंता पैदा की है और इन पर स्पष्ट रणनीति की जरूरत है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : Explainer: क्या राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट हो सकता है भंग? कब-किसने और कैसे किया था गठन, क्यों छिड़ा विवाद; 5 पॉइंट में जानें सबकुछ

---विज्ञापन---

बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, अखिल भारतीय पदाधिकारी, देशभर के प्रांत प्रचारक और भाजपा संगठन महामंत्री के शामिल होने की संभावना है. 7 जुलाई से ही शीर्ष पदाधिकारी बेलगावी पहुंचना शुरू करेंगे.

---विज्ञापन---

राम मंदिर विवाद को लेकर सूत्रों का कहना है कि संघ और वीएचपी सार्वजनिक तौर पर एसआईटी जांच का इंतजार करने की बात कह चुके हैं, लेकिन संगठन के भीतर यह चिंता भी है कि आरोप सामने आने के बाद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए. कुछ पदाधिकारियों का मानना है कि इससे राम जन्मभूमि आंदोलन की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है और मंदिर प्रबंधन के बेहतर मॉडल पर भी विचार करने की जरूरत है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : कौन हैं राम मंदिर के ट्रस्टी चंपत राय? सरकारी नौकरी छोड़ी… नहीं की शादी; चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने की पूछताछ

---विज्ञापन---

बैठक में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की खामियां भी प्रमुख एजेंडे में रह सकती हैं. संघ का मानना है कि इस समस्या का सबसे ज्यादा असर युवाओं पर पड़ा है. सरकार भले ही ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर नाराजगी बनी हुई है. ऐसे में संगठन इस मुद्दे पर अपने स्तर पर भी आगे की रणनीति तय कर सकता है.

इन मुद्दों के अलावा शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा, संगठन के विस्तार और भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी. साथ ही संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के प्रस्ताव पर भी विचार होगा. अगले वर्ष से 'प्रांत प्रचारक' व्यवस्था की जगह 'राज्य प्रचारक' और 'संभाग प्रचारक' व्यवस्था लागू करने की तैयारी पर भी मंथन होने की संभावना है.