CJP Tiranga March: दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके को 16 अक्टूबर 2026 को कनॉट प्लेस में ‘तिरंगा मार्च’ को रोकने से इनकार कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के इस आश्वासन को दर्ज कर लिया कि इस जमावड़े को कंट्रोल करने के लिए उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 नवंबर की तारीख तय की है.
ये अर्जी क्यों दायर की गई?
दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट पालिका बाजार में काम करने वाले एक स्ट्रीट वेंडर, अनिल कुमार गुप्ता की तरफ से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. उन्होंने कनॉट प्लेस और सेंट्रल दिल्ली के दूसरे हिस्सों में प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग की. उनका तर्क था कि इस तरह की भीड़ से ट्रैफिक में रुकावट पैदा हो सकती है, कॉमर्शियल एक्टिविटीज पर असर पड़ सकता है और लोकल ट्रेडर्स की रोजी रोटी को नुकसान पहुंच सकता है. याचिका में अदालत से मांग की गई कि वो CJP को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में, या ऐसी जगहों पर जहां प्रदर्शन करने की ऑफिशियल परमिशन नहीं है, विरोध प्रदर्शन, मार्च या सार्वजनिक सभाएं आयोजित करने से रोके.
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वकील सचिन पुरी ने एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन डब्ल्यू साम्ब्रे की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने ये मामला उठाया. उन्होंने सार्वजनिक आवाजाही और व्यापार पर पड़ने वाले संभावित असर को देखते हुए तत्काल दखल की मांग की. दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि प्रोटेस्ट को हैंडल करने के लिए इंतजाम शुरू कर दिए गए हैं और भरोसा दिलाया कि वो कानूनी दायरे में रहते हुए हर मुमकिन कदम उठाएंगे.
CJP ‘तिरंगा मार्च’ क्यों आयोजित कर रहा है?
अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से शुक्रवार शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगे के साथ इकट्ठा होने को कहा है. ये ऐलान CJP नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी और उन्हें रिमांड पर भेजे जाने के बाद की गई है. इन दोनों नेताओं और पार्टी कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे को बिना इजाजत जंतर-मंतर में एंट्री करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. हाल ही में इस विरोध स्थल को प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगहों की लिस्ट से हटा दिया गया था.
दीपके ने की अपील
‘एक्स’ पर शेयर किए गए एक वीडियो में दीपके ने दिल्ली के बाहर रहने वाले लोगों से भी अपील की कि वो अपने-अपने शहरों में इसी तरह के ‘तिरंगा मार्च’ आयोजित करें. उन्होंने कहा कि इन प्रदर्शनों के जरिए ये संदेश दिया जाएगा कि राष्ट्रीय ध्वज को साथ रखना और उसे लहराना कोई अपराध नहीं माना जाना चाहिए.
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