देश में पिछले एक साल में 3 बड़े हाई प्रोफाइल हत्याकांड सुर्खियों में रहे। तीनों हत्याकांड ने पूरे देश को इतना झकझोर दिया कि हत्यारोपियों को फांसी की सजा की मांग की गई। तीनों केस कोर्ट में विचाराधीन हैं और पीड़ितों को इंसाफ का इंतजार है। ताजा केस पुणे के केतन अग्रवाल के मर्डर का है, जिसकी हत्या के आरोप उसकी मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी पर लगे हैं। केतन के परिजनों ने उसे फांसी की सजा देने की मांग की है। वहीं सिया के परिजनों का कहना है कि अगर हमारी बेटी दोषी है तो उसे फांसी की सजा दी जाए।

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तीन महीने में हुए थे यह 2 घिनौने हत्याकांड

वहीं एक मामला मार्च 2025 में मेरठ के सौरभ राजपूत की हत्या का है, जिसमें आरोपी सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसका प्रेमी साहिल शुक्ला है। दोनों ने सौरभ की हत्या करके उसके शव के टुकड़े करके नीले ड्रम में भरकर सीमेंट से सील कर दिए थे। इस हत्याकांड ने पूरे देश को हिला दिया था। एक मामला मई 2025 में इंदौर के राजा रघुवंशी की हत्या का है, जिसके उसकी पत्नी सोनम रघुवंशी ने मेघायल के शिलॉन्ग में हनीमून के दौरान प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिलकर मौत के घाट उतार दिया था। शव को खाई में फेंक दिया था।

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1955 में पहली-आखिरी बार महिला को फांसी

सिया के साथ-साथ सोनम और मुस्कान को भी फांसी की सजा देने की मांग पीड़ितों ने की है। दोनों आरोपियों के परिजन भी उन्हें फांसी की सजा दिए जाने की बात कह चुके हैं, लेकिन भारत में किसी महिला को फांसी देने के मामले दुलर्भ रहे हैं। हालांकि जून 2026 तक 21 महिलाओं को फांसी की सजा हो चुकी है और वे जेल में हैं, लेकिन अभी तक फांसी दी नहीं गई है। वहीं आज तक देश में पहली और आखिरी बार सिर्फ एक महिला को फांसी दी गई थी और यह भी 1955 में हुआ था। उसके बाद आज तक किसी महिला को फांसी नहीं दी गई।

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कौन थी रतनबाई जैन और क्यों हुई थी फांसी?

देश में पहली और आखिरी बार रतनबाई जैन को फांसी दी गई थी। 3 जनवरी 1955 को रतनबाई को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाया गया था। निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने रतनबाई को 3 लड़कियों को जहर देकर मौत के घाट उतारने का दोषी ठहराया था और मौत की सजा सुनाई थी। रतनबाई जैन दिल्ली के फर्टिलिटी क्लीनिक में मैनेजर थी। उसे पति के 3 लड़कियों उसके अवैध संबंध होने का शक था। रतन ने उन तीनों लड़कियों को खाने-पीने की चीजों में जहर देकर तड़पा-तड़पाकर मारा था। जिला एवं सत्र न्यायालय ने रतनबाई को मौत की सजा सुनाई। मामला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गया, लेकिन रतनबाई की क्रूरता के मद्देनजर उसे मौत की सजा सुनाई गई, जो 3 जनवरी 1955 को दी गई।

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जून 2026 तक 21 महिलाओं को फांसी की सजा

बता दें कि रतनबाई के बाद आज तक किसी महिला को फांसी की सजा नहीं दी गई, लेकिन 21 महिलाओं को फांसी की सजा मिली हुई है और वे वर्तमान में जेल में कैद हैं। इनमें 3 केसों की दोषी सबसे ज्यादा चर्चित और भयावह हैं। एक दोषी उत्तर प्रदेश के अमरोहा की शबनम अली है, जिसने अप्रैल 2008 में प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने परिवार के 7 सदस्यों माता-पिता, 2 भाई, भाभी, मसेरे भाई और 10 महीने के भतीजे की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी शबनम की फांसी की सजा को बरकरार रखा है और वह 15 साल से जेल में बंद है।

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दूसरा केस महाराष्ट्र के कोल्हापुर की सगी बहनों रेणुका शिंदे और सीमा गावित का है, जिन्हें साल 2001 में फांसी की सजा हुई थी। इन्होंने अपनी मां अंजनाबाई के साथ मिलकर 13 बच्चों का अपहरण किया था और उनमें से 9 बच्चों की हत्या कर दी थी। तीसरा केस हरियाणा के यमुनानगर जिले के सोनिया और संजीव का है। सोनिया हरियाणा के पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया की बेटी है। सोनिया ने अपने पति संजीव के साथ मिलकर साल 2001 में जमीन और पैसे के विवाद में 8 हत्याएं की थी। सोनिया ने अपने पिता, सौतेली मां और भाई-बहन समेत 8 लोगों की मारा था।