केरल के वट्टियूरकावु विधानसभा क्षेत्र में सोमवार को केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की चुनावी सभा के दौरान एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई. मंच पर उस समय हड़कंप मच गया जब भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार और पूर्व आईपीएस अधिकारी आर श्रीलेखा अचानक नाराज होकर कार्यक्रम छोड़कर चली गईं. दरअसल हुआ यह कि जयशंकर ने अपने संबोधन में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का तो जिक्र किया लेकिन स्थानीय उम्मीदवार होने के बावजूद श्रीलेखा का नाम लेना भूल गए. इस बात से श्रीलेखा इतनी आहत हुईं कि वे बीच कार्यक्रम में ही मंच से नीचे उतर गईं जिससे वहां मौजूद कार्यकर्ता और नेता हैरान रह गए. 

नाराजगी की असली वजह

पार्टी सूत्रों के मुताबिक श्रीलेखा की नाराजगी इस बात को लेकर ज्यादा थी कि मंच से पड़ोसी क्षेत्र के उम्मीदवार का नाम तो लिया गया लेकिन उनका जिक्र तक नहीं हुआ. पूर्व नौकरशाह और पार्षद रह चुकीं श्रीलेखा ने अपनी शिकायत राजीव चंद्रशेखर और तिरुवनंतपुरम के मेयर वी वी राजेश के सामने भी दर्ज कराई. बताया जा रहा है कि उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता जी सोमन से भी इस मुद्दे पर काफी तीखी बातचीत की. हालांकि पार्टी के बड़े नेताओं ने तुरंत हस्तक्षेप किया और काफी समझाने-बुझाने के बाद उन्हें दोबारा मंच पर वापस लाया गया जिसके बाद ही कार्यक्रम सामान्य रूप से आगे बढ़ सका.

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चुनावी रण में त्रिकोणीय मुकाबला

वट्टियूरकावु सीट पर इस बार मुकाबला बहुत दिलचस्प और त्रिकोणीय माना जा रहा है. यहां बीजेपी की आर श्रीलेखा का सामना कांग्रेस के दिग्गज नेता के मुरलीधरण और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वी के प्रशांत से हो रहा है. केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है और प्रचार अभियान अब अपने आखिरी दौर में पहुंच चुका है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस बार लगभग 2.71 करोड़ मतदाता 890 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे. अंतिम समय में सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और रैलियों में भारी भीड़ उमड़ रही है.

वार-पलटवार का दौर तेज

प्रचार के आखिरी दिनों में कांग्रेस, बीजेपी और सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है. एलडीएफ ने अपनी प्रगति रिपोर्ट जारी कर दावा किया है कि उसने 2021 के करीब 97 प्रतिशत वादे पूरे कर दिए हैं. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने सीपीआईएम और बीजेपी के बीच गुप्त समझौते का आरोप लगाकर चुनावी माहौल गरमा दिया है. वायनाड भूस्खलन पीड़ितों के लिए जुटाई गई राशि के कुप्रबंधन जैसे मुद्दों को लेकर भी दलों के बीच खींचतान जारी है. ऐसे में जयशंकर की रैली में हुई यह घटना बीजेपी के लिए स्थानीय स्तर पर थोड़ी असहज स्थिति पैदा कर गई है.