मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर अब सात समंदर पार भारत में भी महसूस किया जा रहा है. महाराष्ट्र के पुणे शहर में एलपीजी के गंभीर संकट की वजह से मेस, कैंटीन और रेस्तरां में खाना नहीं बनाया जा रहा है. ऐसे में पुणे के ऐतिहासिक गुरुद्वारों ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है. शहर के गुरुद्वारों ने उन बाहरी छात्रों के लिए अपने दरवाजे और रसोई खोल दी है, जिन्हें दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था.

छात्रों की लाइफलाइन बना लंगर

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे के कैंप स्थित गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार ने ऐलान किया है कि जब तक एलपीजी संकट समाप्त नहीं हो जाता, तब तक वे छात्रों को मुफ्त लंगर खिलाएंगे. यहां दोपहर 12:30 से 2:30 बजे तक और रात में 8:30 से 10:00 बजे तक विशेष रूप से छात्रों के लिए खाना दिया जा रहा है. सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SPPU) और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हजारों छात्र इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं.

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महंगाई की दोहरी मार

छात्रों के मुताबिक, एलपीजी की किल्लत के चलते टिफिन और मेस वालों ने कीमतों में भारी इजाफा कर दिया है. जो टिफिन पहले 50 रुपये में मिलता था, अब उसकी कीमत 70 रुपये हो गई है. कई मेस बंद हो चुके हैं और जो खुले हैं, वे छात्रों के बजट से बाहर हैं. ऐसे में खड़की और कैंप के गुरुद्वारे उनके लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरे हैं.

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'पैसे ले लो, पर गैस दे दो'

हालांकि, गुरुद्वारों के लिए भी यह सेवा जारी रखना आसान नहीं है. औंध गुरुद्वारे के अध्यक्ष मनिंदर सिंह बिंद्रा ने बताया कि कमर्शियल गैस की भारी कमी है. उन्होंने कहा, 'राशन की कोई कमी नहीं है, लेकिन गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे. हमने पुणे नगर निगम (PMC) से लिखित अपील की है कि हमें सिलेंडर दिए जाएं, हम कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हैं.'