चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब केंद्र में सत्तारूढ़ NDA के कुछ सहयोगी दलों ने भी चुनाव आयोग से पूरे मामले पर सफाई मांगी है. केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने भी आयोग से इस मामले में सार्वजनिक तौर पर स्पष्टीकरण देने की बात कही है.
चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और अगर उसकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी है कि वह अपना पक्ष स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखें. उन्होंने कहा कि आयोग को विपक्ष को संतुष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों के मन में पैदा हुए सवालों और आशंकाओं को दूर करने के लिए जवाब देना चाहिए.
यह भी पढ़ें: कौन हैं IAS मनदीप भंडारी, जो संभालेंगे CBSE की कमान, कितने पढ़े-लिखे हैं बोर्ड के नए चेयरमैन?
उपेंद्र कुशवाहा और TDP ने भी उठाया मुद्दा
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि SIR को लेकर लोगों के बीच काफी भ्रम की स्थिति है. उन्होंने चुनाव आयोग से जल्द स्पष्टीकरण जारी कर सही स्थिति स्पष्ट करने की मांग की. वहीं, TDP ने कहा कि SIR पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है, लेकिन चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उससे जुड़े किसी भी सवाल पर उचित स्पष्टीकरण देना जनता का भरोसा मजबूत करने में मदद करेगा.
क्या है पूरा विवाद?
गौरतलब है कि ये पूरा विवाद द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद सामने आया. रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान आयोग के नाम पर लिए गए फैसलों और जारी किए गए आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं. रिपोर्ट में इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, नाम हटाने, बहाल करने और मतदाता डेटा के प्रबंधन जैसे मामलों से बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आपत्तियां SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को लेकर भी थीं. इसी के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके तीनों सदस्यों के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई.
यह भी पढ़ें: ‘एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है’, पाकिस्तानी पत्रकार को एस जयशंकर का करारा जवाब
चुनाव आयोग ने क्या कहा था?
चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद आंतरिक मतभेद की धारणा को खारिज किया. आयोग ने कहा कि किसी भी बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय, टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. आयोग के मुताबिक SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं. आयोग ने यह भी कहा कि लिखित आपत्तियां और आंतरिक जांच-परख की प्रक्रिया पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और कामकाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए होती है.
संबंधित खबरें
'हमें गर्व है', स्मित मच्छार से अस्पताल में मिले UAE के डिप्टी पीएम, जानिए अब कैसी है भारतीय कैप्टन की तबीयत
36 mins agoओडिशा सरकार ने जारी की WII-अदाणी फाउंडेशन की ऑलिव रिडले कछुओं पर स्टडी, सामने आईं अहम जानकारियां
1 hr agoExplainer: क्या है मच्छार जाति का इतिहास और मतलब? कहां से आए इसके लोग, कैसे बना सरनेम
4 hrs ago'ओमानी पायलट ने कुल्हाड़ी से किया था स्मित मच्छार पर हमला', UAE ने दी फ्लाईदुबई 'आतंकी घटना' की डिटेल
5 hrs agoCEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर प्रोटेस्ट को लेकर दिल्ली पुलिस ने दर्ज किए 3 केस
6 hrs agoदिल्ली में रिपीट हुआ 'रिया अहीर मोमेंट', जंतर-मंतर पर महिला ने रोकी प्रदर्शनकारियों से भरी बस, देखें वीडियो
6 hrs agoAaj Ki Taaza Khabar LIVE Updates: BJP सांसद राधा मोहन सिंह फिर से संसद की रक्षा समिति के अध्यक्ष नियुक्त किए गए
10 hrs agoचिनाब पुल, 1200 फीट ऊंचाई, 100KM रफ्तार... दुनिया के सबसे ऊंचे ब्रिज पर दौड़ती 'वंदे भारत' का वीडियो आया सामने
11 hrs agoKal Ka Mausam: दिल्ली-NCR में साफ रहेगा आसमान, विदाई की राह पर मानसून; कुछ राज्यों में हो सकती है हल्की बूंदा-बांदी
21 hrs agoअचानक बस कंडक्टर की तरह टिकट क्यों काटने लगे सीएम विजय? महिलाओं ने मुख्यमंत्री की उतारी बलाएं
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines