पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मंगलवार को हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए जब कई शहरों में बंद और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. रावलकोट, मुजफ्फराबाद, कोटली, भीमबेर, दादियाल, पलांड्री और सुधनोती समेत कई इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और पाकिस्तानी सरकार तथा सेना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. सूत्रों के मुताबिक, रावलकोट में सुबह करीब 11 बजे प्रदर्शन तेज हो गया. प्रदर्शनकारियों ने मुख्य सड़क को जाम कर दिया और सरकार विरोधी नारे लगाए. हालात को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तानी पुलिस, सेना और रेंजर्स को तैनात किया गया. भीमबेर से रावलकोट की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने गोलीबारी, पैलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इस कार्रवाई में कम से कम सात लोगों के घायल होने की खबर है.
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कोटली में भी जोरदार प्रदर्शन
कोटली में भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे. प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते हुए रावलकोट की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे. दादियाल में भी पाकिस्तानी सेना के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन दर्ज किए गए. बंद की वजह से आम नागरिकों को दैनिक जरूरतों की वस्तुएं खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ा. मुजफ्फराबाद, रावलकोट, कोटली, भीमबेर और दादियाल में बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान और बाकी व्यावसायिक गतिविधियां लगभग पूरी तरह बंद रहीं. लोगों का कहना है कि सरकार ने पहले किए गए वादों को पूरा नहीं किया, जिसके चलते नाराजगी लगातार बढ़ रही है.
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दागे गए आंसू गैस के गोले
पलांड्री में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे. वहीं सुधनोती में प्रदर्शनकारियों ने हाथों में लकड़ी की छड़ें लेकर रैली निकाली और पाकिस्तानी सरकार तथा सेना को चेतावनी दी. मुजफ्फराबाद के नीलम ब्रिज इलाके में भी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं. वहां से सामने आए वीडियो और गोलीबारी की फुटेज ने तनाव को और बढ़ा दिया है. प्रदर्शनकारियों की कुल 38 मांगें बताई जा रही हैं. इनमें सबसे प्रमुख मांग सस्ती बिजली और आटा, चावल तथा दाल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी है. प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि पीओके में मौजूद मंगला बांध जैसी जलविद्युत परियोजनाओं से पाकिस्तान को फायदा मिलता है, इसलिए स्थानीय लोगों को कम दरों पर बिजली मुहैया कराई जानी चाहिए.
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क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग?
राजनीतिक स्तर पर प्रदर्शनकारी पीओके विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करने की मांग भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि जिन लोगों का निवास पीओके में नहीं है, वे स्थानीय जनता का प्रतिनिधित्व कैसे कर सकते हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन सीटों पर पाकिस्तान की सेना और ISI का असर बना हुआ है, जिससे स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित होती है. इसी कारण पीओके में लंबे समय से राजनीतिक असंतोष देखने को मिल रहा है. गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों में 31 लोगों की मौत हुई थी. उस समय पाकिस्तान सरकार ने प्रदर्शनकारियों की 38 में से 21 मांगों को स्वीकार करने का आश्वासन दिया था. हालांकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आठ महीने बीत जाने के बाद भी ज्यादातर वादे पूरे नहीं किए गए हैं.
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