मिडिल ईस्ट की जंग ने अब ग्लोबल एनर्जी मार्केट में असर दिखाना शुरू कर दिया है. पीएम मोदी ने सोमवार को संसद में कहा कि इस युद्ध के परिणाम दूरगामी होंगे और भारत को लंबे समय तक पड़ने वाले प्रभाव के लिए खुद को तैयार करना होगा. पीएम मोदी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने और जहाजों पर हो रहे हमलों ने भारत के सामने चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.
पीएम मोदी ने सोमवार को लोकसभा में कहा, 'पिछले दशक में, भारत ने संकट के समय के लिए क्रूड ऑयल के स्टोरेज को प्राथमिकता दी है. आज, हमारे पास 53 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है, और इसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा करने के लिए काम चल रहा है. पहले, हम 27 देशों से इंपोर्ट करते थे; आज, हम 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट करते हैं.'
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पीएम मोदी ने कहा कि घरेलू तैयारी को मजबूत करना एक मुख्य फोकस रहा है. उन्होंने कहा कि हमारी रिफाइनिंग कैपेसिटी भी बढ़ी है. उन्होंने कहा कि हम तेल और गैस की रेगुलर सप्लाई पक्का करने के लिए कई देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं.
PM मोदी ने यह भी माना कि चल रहे संघर्ष ने जैसी चुनौतियां खड़ी की हैं, वैसा भारत में पहले कभी नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि 'इस युद्ध ने अचानक आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी और मानवीय चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. भारत के उन देशों के साथ गहरे व्यापारिक रिश्ते हैं जो इस संघर्ष में शामिल हैं और इससे प्रभावित हैं. यह इलाका हमारे ग्लोबल ट्रेड के लिए भी एक जरूरी रास्ता है, और हमारे क्रूड ऑयल और गैस इंपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है.'
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बता दें, अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था. होर्मुज स्ट्रेट रूट से ग्लोबल एनर्जी खपत का पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है.