प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे का दूसरा दिन (26 फरवरी 2026) रक्षा, तकनीक और कूटनीतिक मजबूती के नाम रहेगा. आज 10 अरब डॉलर के महा-समझौतों और हथियारों के साझा उत्पादन पर अंतिम मुहर लग सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच आज होने वाली आधिकारिक बातचीत भारत और इजरायल के रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाली है. इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच मौजूदा सुरक्षा समझौतों को आज की आधुनिक चुनौतियों और साइबर सुरक्षा की जरूरतों के हिसाब से अपडेट किया जाएगा. लंबे समय से रुके हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की दिशा में भी किसी बड़ी घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है. इसके अलावा, भारत में खेती को आधुनिक बनाने के लिए इजरायल की मशहूर ड्रिप सिंचाई तकनीक के विस्तार पर भी समझौता होना लगभग तय माना जा रहा है.
हाई-टेक भविष्य के लिए साझा कदम
भारत और इजरायल अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे भविष्य की तकनीक को मिलकर गढ़ने की तैयारी में हैं. इस यात्रा के दौरान सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों के विकास के लिए संयुक्त फंड या विशेष अनुसंधान केंद्रों की घोषणा हो सकती है. दोनों देशों के विशेषज्ञों का मानना है कि इन आधुनिक तकनीकों में साझा निवेश से न केवल रोजगार बढ़ेंगे बल्कि भारत ग्लोबल टेक हब बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ाएगा. यह तकनीकी मेल-मिलाप दोनों देशों के युवाओं के लिए भी नए अवसर लेकर आने वाला है.
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें: कूटनीति के बादशाह बने PM मोदी, इजरायल और फिलिस्तीन दोनों से मिला सर्वोच्च सम्मान, दुनिया में रचा इतिहास
---विज्ञापन---
खरीद से आगे बढ़कर साझा उत्पादन पर जोर
भारत और इजरायल के रिश्तों का असली आधार स्तंभ रक्षा क्षेत्र रहा है, लेकिन अब फोकस सिर्फ हथियार खरीदने के बजाय उनके मिलकर उत्पादन (Joint Production) पर है. भारत अब इजरायल की बेहद सस्ती और असरदार लेजर सुरक्षा प्रणाली 'आयरन बीम' में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है, जो पलक झपकते ही ड्रोन और रॉकेटों को ढेर कर सकती है. साथ ही, भारत के अपने स्वदेशी एयर डिफेंस शील्ड 'सुदर्शन चक्र' को और अधिक ताकतवर बनाने के लिए इजरायल की आयरन डोम और एरो प्रणालियों के साथ तकनीकी तालमेल बिठाने पर भी गंभीर बातचीत होगी.
रक्षा सौदों में ऐतिहासिक उछाल और मिसाइल डील
इस यात्रा के दौरान लंबी दूरी की मिसाइलों जैसे 'लोरा' (LORA) और 'आइस ब्रेकर' के भारत में ही निर्माण के लिए बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. इसके अलावा, 'हर्मिस 900' जैसे बेहद आधुनिक ड्रोन्स के साझा उत्पादन को लेकर भी चर्चा अंतिम दौर में है. आंकड़ों की बात करें तो साल 2026 की शुरुआत से अब तक दोनों देशों के बीच लगभग 8.6 अरब डॉलर के सौदे तय हो चुके हैं. उम्मीद है कि पीएम मोदी की इस यात्रा के खत्म होने तक यह आंकड़ा 10 अरब डॉलर के जादुई स्तर को पार कर जाएगा, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड होगा.