प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ का विधिवत उद्घाटन किया. इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए चिन्मय मिशन के कार्यों की जमकर सराहना की. प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन से जुड़ना उनके लिए बेहद सौभाग्य की बात है. उन्होंने कहा कि मिशन ने दशकों तक समाज की निस्वार्थ सेवा की है और भारत के आध्यात्मिक दर्शन व ज्ञान को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने का ऐतिहासिक काम किया है. उन्होंने भारतीय संस्कृति और मूल्यों के संरक्षण को राष्ट्र निर्माण के लिए अनिवार्य बताया. कार्यक्रम में देश-विदेश से आए कई गणमान्य लोग और चिन्मय मिशन से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे.
विरासत पर गर्व का आह्वान
सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं के केंद्र में देश के युवा हैं. उन्होंने जोर दिया कि भारतीय विरासत और ज्ञान परंपरा पर गर्व करना तथा उसका संरक्षण करना हर नागरिक का दायित्व है. जब तक युवा अपनी जड़ों और समृद्ध विरासत से नहीं जुड़ेंगे, तब तक विकास की यात्रा अधूरी रहेगी.
‘ज्ञान और अनुसंधान में लगा है भारत’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का ज्ञान और बोध अमर है. इसी आत्मबोध के बल पर भारत हजारों वर्षों से अजर-अमर बना हुआ है. उन्होंने ‘भारत’ शब्द का वास्तविक अर्थ समझाते हुए कहा कि जो ज्ञान और प्रकाश के अनुसंधान में निरंतर लगा रहे, वही वास्तव में भारत है. पीएम मोदी ने देश की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि जब यह ऐतिहासिक अवसर सामने आया था, तब मन में विचार था कि इसे केवल एक आयोजन तक सीमित न रखा जाए. इसे भारत के लिए एक बड़ा प्रेरणा मंच बनाना था, जिससे देश के उस जीवंत स्वरूप को गति मिले जो हमेशा से अमृत विचारों को जीना जानता है.
चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे
यह तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सालभर के कार्यक्रमों का समापन पर्व है. चिन्मय मिशन की नींव वर्ष 1951 में स्वामी चिन्मयानंद जी ने रखी थी. उनका मुख्य उद्देश्य वेदांत और श्रीमद्भगवद्गीता के गूढ़ ज्ञान को हर आम नागरिक तक सरल और सहज भाषा में पहुंचाना था. भारत मंडपम में आयोजित इस सम्मेलन में देश और दुनिया भर से 9,000 से अधिक प्रतिभागी और श्रद्धालु पहुंचे हैं. अपने दशकों के सफर में चिन्मय मिशन ने केवल आध्यात्मिक ज्ञान तक सीमित न रहकर शिक्षा, भारतीय संस्कृति के संरक्षण, युवा सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान के क्षेत्रों में भी व्यापक योगदान दिया है.
गौरतलब है कि 75वें वर्ष के इस महोत्सव की शुरुआत पिछले साल हुई थी, जब प्रधानमंत्री मोदी ने तमिलनाडु में चिन्मय मिशन द्वारा तैयार कराई गई श्रीमद्भगवद्गीता के तमिल काव्यानुवाद का विमोचन किया था.