संतरे बेचकर अपने गांव में स्कूल बनवाने वाले और साल 2020 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से नवाजे गए कर्नाटक के मशहूर शिक्षाविद् हरेकला हजब्बा को चुनाव आयोग ने एक नोटिस जारी किया है. नोटिस कर्नाटक में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची में नाम की विसंगति को लेकर भेजा गया है.

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, साल 2002 की पुरानी मतदाता सूची में उनका नाम केवल 'हजब्बा' दर्ज था. जबकि इसके बाद के सभी आधिकारिक दस्तावेजों में उनका पूरा नाम 'हरेकला हजब्बा' दर्ज है. उनके आधिकारिक पहचान पत्रों, राशन कार्ड, पासपोर्ट, नए वोटर आईडी कार्ड और पद्मश्री सम्मान से जुड़े सभी दस्तावेजों में उनका नाम 'हरेकला हजब्बा' ही है. नाम ये फर्क आने पर चुनाव आयोग ने इसे 'विसंगति' कैटेगरी में डाल दिया.

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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने उनके आवास पर जाकर यह नोटिस सौंपा और उन्हें 11 सितंबर को सभी मूल दस्तावेजों के साथ ग्राम पंचायत के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है. सुनवाई के दौरान ग्राम लेखाकार दस्तावेजों का फिजिकल वैरिफिकेशन करेंगे.

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संतरे बेचने से लेकर पद्मश्री तक का सफर

कर्नाटक के मंगलुरु में सड़कों और बस स्टैंड पर संतरे बेचकर आजीविका चलाने वाले अनपढ़ हरेकला हजब्बा ने शिक्षा की अहमियत को समझा. उन्होंने अपनी रोजाना की मामूली बचत से अपने पैतृक गांव में बच्चों के लिए एक प्राइमेरी स्कूल की नींव रखी थी. इसके लिए भारत सरकार ने उन्हें साल 2020 में पद्मश्री से सम्मानित किया था.

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कर्नाटक में 43 लाख से ज्यादा लोगों को नोटिस

चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, हजब्बा उन करीब 44 लाख मतदाताओं में शामिल हैं, जिन्हें कर्नाटक एसआईआर के तहत नोटिस भेजे जा रहे हैं. 'नो मैपिंग' और 'विसंगतियों' वाली श्रेणियों के तहत अब तक 43.81 लाख से अधिक नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें से 7.31 लाख से अधिक तामील हो चुके हैं. दावों और आपत्तियों के निस्तारण की यह प्रक्रिया 24 अगस्त से 22 अक्टूबर तक चलेगी. इसके बाद आखिरी वोटर लिस्ट 27 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी.

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