दिल्ली के भारत मंडपम में संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन के साथ ही घरेलू राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. सम्मेलन के अवसर पर आयोजित विशेष गाला डिनर के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया. दूसरी ओर, भाजपा शासित छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें अपनी मौजूदगी दर्ज कराई.
डिनर में कौन-कौन शामिल हुआ?
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, गाला डिनर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शामिल हुईं.
यह भी पढ़ें : ब्रिक्स समिट 2026 में PM मोदी की 10 कूटनीतिक कामयाबियां, दुनिया के सामने दिखी भारत की बढ़ती ताकत
वहीं, विपक्ष शासित राज्यों से केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस डिनर में नहीं पहुंचे. हालांकि, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश से जुड़े सूत्रों ने दावा किया कि उनके मुख्यमंत्रियों के पहले से तय आधिकारिक कार्यक्रम थे.
विपक्ष ने पहले भी किया है बहिष्कार
राष्ट्रीय स्तर के बड़े आयोजनों से विपक्षी मुख्यमंत्रियों का किनारा करना नया नहीं है. इससे पहले जुलाई 2024 में गैर-एनडीए शासित राज्यों के साथ भेदभावपूर्ण बजट का आरोप लगाते हुए कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की 9वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक का बहिष्कार किया था. इससे पहले साल 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित जी20 डिनर से भी कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री दूर रहे थे. हालांकि, तब तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने इसमें भाग लिया था.
यह भी पढ़ें : ब्रिक्स समिट 2026 की बेहतरीन यादें बन गईं ये तस्वीरें, पीएम मोदी का भी दिखा खास अंदाज
कांग्रेस ने साधा निशाना
इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने ब्रिक्स समिट के नतीजे और ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ पर निशाना साधते हुए इसे उम्मीदों से काफी कमतर आंका है. पार्टी ने आरोप लगाया कि घोषणापत्र में अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में सीमा तनाव को लेकर कोई कड़ा संदेश नहीं दिया गया.
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा, ‘चीन ने जिस तरह से अरुणाचल और लद्दाख जैसे इलाकों पर कब्जा कर रखा है, उसे देखते हुए प्रधानमंत्री को खुलकर बोलना चाहिए था और चीनी सैनिकों की वापसी की मांग करनी चाहिए थी. अगर ऐसा होता तो यह भारत के लिए इस शिखर सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि होती.’
यह भी पढ़ें : क्या निकला BRICS समिट 2026 का रिजल्ट, किस देश को हुआ फायदा और किसे लगा झटका? 5 पॉइंट में जानें
वहीं, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने आतंकवाद के मुद्दे पर घेरते हुए कहा, ‘जारी किए गए दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद और पहलगाम की घटना की निंदा तो की गई है, लेकिन क्या इसमें कहीं यह दर्ज है कि इस हमले को किसने अंजाम दिया? क्या यह बताया गया है कि दुनिया भर में आतंकवाद कौन फैला रहा है? घोषणापत्र में इसका कोई जिक्र नहीं है.’
संबंधित खबरें
अब आम आदमी भी दे सकेगा घुसपैठ-डेमोग्राफी में बदलाव की जानकारी, पोर्टल लॉन्च
4 hrs ago'बहाने नहीं चलेंगे', वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिलने पर SC ने EC को लगाई फटकार
4 hrs ago'आप देश को क्यों बर्बाद कर रहे हो...', एयरपोर्ट पर दीपके को लोगों ने घेरा
7 hrs ago'न्याय के इंतजार में अंकिता भंडारी', माता-पिता से मिलकर बोले राहुल गांधी
7 hrs agoसुप्रीम कोर्ट पहुंचा जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट बैन का मामला, याचिका दाखिल
10 hrs agoदिव्यांगों को जन्म से 40% पेंशन, मोदी कैबिनेट ने लिए कई बड़े फैसले
11 hrs agoदिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, 78 दिनों का मिलेगा बोनस
11 hrs ago'हम आपके पैरों पर गिरकर माफी मांगते हैं...' हिरासत पर क्या बोले ध्रुव राठी?
12 hrs agoकोलकाता राजधानी के फर्स्ट AC में पुराने कंबल नहीं, मिलेंगे फ्लोरल कम्फर्टर
13 hrs ago'गला दबाया, चेहरा नाखूनों से नोचा', राहुल ने NSUI छात्रा को बताया शेरनी
14 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines