प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने किसानों से बड़े पैमाने पर प्याज खरीदकर बफर स्टॉक तैयार किया, लेकिन महाराष्ट्र के नासिक जिले के लासलगांव से अब इसी सरकारी स्टॉक के खराब होने की खबर सामने आई है. लासलगांव-मनमाड रोड स्थित CWC के गोदाम में बड़ी मात्रा में प्याज सड़ने, बोरियों में कीड़े लगने और चारों तरफ दुर्गंध फैलने की बात सामने आई है. सड़े प्याज से निकल रहा काला और बदबूदार तरल भी परेशानी का कारण बना हुआ है.
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1.21 लाख टन प्याज सरकार ने खरीदा
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्याज का 2 लाख टन बफर स्टॉक तैयार करने का लक्ष्य रखा था. इसके तहत NAFED और NCCF के जरिए 15 मई से खरीद शुरू की गई. केंद्र के मुताबिक 26 अगस्त तक करीब 1.21 लाख टन प्याज खरीदा जा चुका था. महाराष्ट्र में 4 जुलाई से प्याज की खरीद दर बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल की गई थी. खरीदे गए प्याज को नासिक समेत अलग-अलग जगहों पर भंडारित किया गया, ताकि कीमत बढ़ने पर इसे बाजार में उतारकर उपभोक्ताओं को राहत दी जा सके.
CWC गोदाम में सड़ते प्याज ने बढ़ाई चिंता
लासलगांव के CWC गोदाम में प्याज खराब होने की खबर के बाद भंडारण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय सूत्रों के मुताबिक कई बोरियों में कीड़े और मैगट पाए गए हैं और सड़े प्याज की वजह से गोदाम के आसपास बदबू फैल रही है. एक वरिष्ठ NAFED अधिकारी के हवाले से रिपोर्टों में करीब 30 प्रतिशत बफर स्टॉक के खराब होने का अनुमान बताया गया है. हालांकि, लासलगांव के इस विशेष गोदाम में कितनी मात्रा खराब हुई है, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है.
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बारिश बनी वजह या भंडारण में लापरवाही?
अधिकारियों की ओर से प्याज की खराब गुणवत्ता और इस साल हुई असामान्य बारिश को भी स्टॉक खराब होने की वजह बताया गया है. लेकिन सवाल यह है कि अगर प्याज में नमी या गुणवत्ता संबंधी समस्या थी, तो उसे वैज्ञानिक तरीके से सुखाने, ग्रेडिंग करने और समय-समय पर उसकी जांच करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही? PSF की गाइडलाइंस में भी प्याज जैसी नष्ट होने वाली कृषि उपज के लिए वैज्ञानिक भंडारण, नियमित गुणवत्ता जांच और समय पर खराब स्टॉक के निपटारे पर जोर दिया गया है.
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किसानों और व्यापारियों की जांच की मांग
लासलगांव देश के प्रमुख प्याज बाजारों में शामिल है. ऐसे में सरकारी स्टॉक के खराब होने की खबर ने किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है. मांग उठ रही है कि गोदाम में रखे पूरे स्टॉक की जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि प्याज किस स्तर पर और कितनी मात्रा में खराब हुआ. फिलहाल खराब हुए प्याज की सटीक मात्रा और इससे हुए आर्थिक नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है. जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि स्टॉक खराब होने के पीछे मौसम और प्याज की गुणवत्ता कितनी जिम्मेदार थी और भंडारण या निगरानी में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं.
सरकार के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि बफर स्टॉक का उद्देश्य ही यही है कि जरूरत के समय प्याज बाजार में उतारकर कीमतों को नियंत्रित किया जाए. ऐसे में अगर सरकारी स्टॉक ही गोदाम में खराब हो जाए, तो सवाल सिर्फ प्याज की बर्बादी का नहीं, बल्कि पूरी बफर स्टॉक व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही का बन जाता है.
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