ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले की तपिश अब दिल्ली-एनसीआर तक पहुंच गई है. खामेनेई की मौत के बाद भारत के कई हिस्सों में विरोध की लहर है. दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में एक अलग तरह का सन्नाटा पसरा है - करोड़ों के घाटे और डूबते व्यापार का डर है.

व्यापारियों को डर है कि अगर युद्ध जल्द खत्म नहीं हुआ तो इसका सीधा असर उनके बिजनेस पर पड़ेगा और उन्हें करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ जाएगा. व्यापारियों का कहना है कि युद्ध की वजह से निर्यात पर सीधा असर पड़ रहा है. साथ ही कई निर्यातकों के ऑर्डर बीच में अटक गए हैं.

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बता दें, गाजियाबाद और नोएडा में करीब 60 इंडस्ट्रियल क्षेत्र हैं. जिला उद्योग केंद्र में छोटी, मध्यम और बड़ी करीब एक लाख औद्योगिक यूनिट्स रजिस्टर्ड हैं. इसमें 45 हजार से अधिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं. एक आंकड़े के मुताबिक, गाजियाबाद से सालाना 22 हजार करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट होता है.

वर्षों से व्यापार कर रहे सनोज गिरी ने बताया कि मिडिल ईस्ट में 1500 करोड़ रुपये निर्यात होता ही है और किसी किसी साल यह बढ़ भी जाता है. इसके अलावा पेट्रोलियम पदार्थों का भी आयात किया जाता है. अगर इसी तरह दोनों देशों के बीच लड़ाई चलती रही तो इसका असर कारोबार पर पड़ेगा और कारोबार पूरी तरह से ठप हो जाएगा. पहले कोरोना ने हमें बर्बाद कर दिया और अब हम भारी घाटे से उबरे है तो अब यह युद्ध विनाशकारी बनकर आया है.

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ऐसा ही हाल नोएडा का है, जहां व्यापारियों को निर्यात के साथ-साथ कच्चे माल के दाम बढ़ने की चिंता सता रही है. नोएडा के व्यापारियों ने बताया कि ज्यादातर ईरान में कपड़े, ऑटो पार्ट्स और लेदर के सामानों का निर्यात किया जाता है. लेकिन युद्ध की वजह से उनका बिजनेस पूरी तरह से प्रभावित होने लगा है. क्योंकि, नए माल का ऑर्डर नहीं मिल पा रहा है. जो आर्डर आए थे, उन्हें कैंसिल किया जा रहा है.

व्यापारी नरेश के मुताबिक ईरान के व्यापारियों के साथ उनके वर्षों पुराने संबंध हैं. इस युद्ध ने दोनों देशों के व्यापारियों को अचानक जमीन पर लाकर पटक दिया है. क्योंकि हर महीने करोड़ों रुपये के कपड़े का निर्यात किया जाता है. अचानक ईरान पर हमला होने से निर्यात फंस गया है. यह भी डर सता रहा है कि पहले से दिए गए ऑर्डर का भुगतान होगा या नहीं.

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कारोबारी मनोज ने बताया कि सूखे मेवे का सबसे ज्यादा आयात ईरान से होता है. व्यापारी कृष्णा ने बताया कि गाजियाबाद से इंजीनियरिंग और मशीनरी गुड्स का निर्यात होता है. इसके अलावा, रेडीमेड गारमेंट, टेक्सटाइल, हर्बल, ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स, दवाइयां, मशीनरी पार्ट्स, लिफ्ट और फर्निशिंग शामिल है.

व्यापार संघ के अध्यक्ष सनोज गिरी के मुताबिक यदि युद्ध लंबा चला तो निर्यात पूरी तरह से ठप हो जाएगा. सनोज गिरी के मुताबिक उनकी मशीनरी के पार्ट मिडिल ईस्ट के देशों में भेजे गए हैं. सामान के बिल कोरियर कंपनी से भेजे गए हैं. कुरियर कंपनी का पैकेट दुबई में फंस गया है. हवाई अड्डे बंद होने से उनके बिल बीच में अटके हैं. अब उनका माल पहले पहुंच जाएगा और बिल बाद में. बगैर बिल के कंपनी माल नहीं ले पाएगी और उनका भुगतान भी फंस गया है. मशीनरी की कीमत करोड़ों रुपये में हैं.

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इतना ही नहीं इस युद्ध से औद्योगिक इकाइयों के मालिकों से फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर तक डरे और सहमें हुए है क्योंकि डिमांड में कमी आना शुरू हो चुकी है. इससे प्रोडक्शन कम किया जा रहा है. ऐसा अगर आगे भी चलता रहा तो डेली बेसिस पर काम करने वाले मजदूरों पर रोजगार का संकट पैदा हो जाएगा.