मुंबई के पायधुनी इलाके में एक ही परिवार के चार लोगों की रहस्यमयी मौत के मामले में आखिरकार 11 दिन बाद बड़ा खुलासा हो गया है. जिस ‘तरबूज’ को अब तक मौत की वजह माना जा रहा था, अब जांच में सामने आया है कि परिवार के चारों सदस्यों के शरीर में चूहे मारने की जहरीली दवा जिंक फॉस्फाइड (Zinc Phosphide) के निशान मिले हैं. यही नहीं, फॉरेंसिक जांच में तरबूज के सैंपल में भी वही जहरीला पदार्थ पाया गया है.

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है. अब पुलिस यह जांच कर रही है कि आखिर तरबूज में जहर पहुंचा कैसे? क्या यह हादसा था, साजिश थी या फिर पूरे परिवार ने सामूहिक आत्महत्या की? 26 तारीख की रात मुंबई के पायधुनी इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया था, जब डोकाडिया परिवार के चार सदस्यों की कुछ ही घंटों के भीतर मौत हो गई. मृतकों में अब्दुल्ला डोकाडिया (44), उनकी पत्नी नसरीन (35), बेटी आयशा (16) और ज़ैनब (13) शामिल थीं. शुरुआती जानकारी में सामने आया था कि परिवार ने रात में तरबूज खाया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और फिर एक-एक कर चारों की मौत हो गई.

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घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई थी. लोग इसे ‘जहरीले तरबूज’ का मामला मान रहे थे. पुलिस ने तुरंत तरबूज के नमूने जांच के लिए भेजे थे और शवों का पोस्टमार्टम कराया गया था. अब हिस्टोपैथोलॉजिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पूरे केस की तस्वीर बदल दी है. सूत्रों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि चारों के शरीर में जिंक फॉस्फाइड की मौजूदगी मिली. यह एक बेहद खतरनाक रसायन है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर चूहे मारने की दवा में किया जाता है. यही पदार्थ तरबूज के नमूनों में भी पाया गया है.

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सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि यह जहर तरबूज तक पहुंचा कैसे? क्या किसी ने जानबूझकर तरबूज में जहर मिलाया था? या फिर परिवार ने खुद इसे खाया? पुलिस अब परिवार के करीबी लोगों, घरेलू हालात और हाल के घटनाक्रमों की गहराई से जांच कर रही है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि फिलहाल सभी एंगल्स पर जांच जारी है. सामूहिक आत्महत्या की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा, लेकिन हत्या या किसी साजिश की संभावना को भी खुला रखा गया है.

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मुंबई के इस रहस्यमयी ‘तरबूज मौत कांड’ ने अब एक साधारण फूड पॉइजनिंग केस से आगे बढ़कर हाई-प्रोफाइल मिस्ट्री का रूप ले लिया है. 11 दिन बाद भले ही मौत की असली वजह सामने आ गई हो, लेकिन यह सवाल अब भी बरकरार है कि आखिर डोकाडिया परिवार की थाली तक मौत पहुंची कैसे?