क्या है संसद सत्र का सत्रावसान, स्थगन से कितना अलग? कब तक स्थगित रह सकता सेशन, 7 पॉइंट में जानें सबकुछ

मानसून सत्र 2026 का सत्रावसान नहीं हुआ है और ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि सत्र का सत्रावसान न किया गया हो. सरकार अपनी जरूरत के अनुसार सत्रावसान पर रोक लगा सकती है तो आइस सत्रावसान के बारे में विस्तार से बात करते हैं…

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संसद के मानसून सत्र 2026 का औपचारिक समापन नहीं किया गया है. (Credit-ANI)

संसद के मानसून सत्र को स्थगित हुए 70 दिन बीत गए हैं, लेकिन अभी तक सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है. साल 2026 में संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई के शुरू हुआ था और इसके दोनों सदनों को 13 अगस्त 2026 को स्थगित कर दिया गया था, लेकिन सत्र का औपचारिक समापन नहीं किया गया है. हालांकि परिसीमन बिल और महिला आरक्षण विधेयक को पास कराने के लिए विशेष सत्र बुलाने की अटकलेंन सियासी गलियारों में लगी थीं, लेकिन अभी तक विशेष सत्र बुलाया नहीं गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि संसद सत्र का समापन कैसे होगा, इसका फैसला कौन करता है? किसी सत्र को कब तक स्थगित रखा जा सकता है?

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अनिश्चितकाल के लिए सत्र का स्थगन होना क्या है?

संसद सत्रों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जाता है और इसका मतलब यह है कि मौजूद सत्र की बैठकें नहीं लगेंगी. लोकसभा को लोकसभा स्पीकर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करते हैं और राज्यसभा को सभापति अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करते हैं. लेकिन संसद के दोनों सत्रों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का मतलब सत्र का समापन नहीं होता है, बल्कि टेक्निकली संसद सत्र जारी है, लेकिन उसकी बैठकें नहीं लगेंगी.

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संसद सत्र का सत्रावसान क्या है और कैसे होता?

बता दें कि सत्रावसान का मतलब संसद सत्र का औपचारिक समापन होता है, जिसकी मंजूरी राष्ट्रपति देते हैं, यानी राष्ट्रपति की मंजूरी से ही संसद सत्र का औपचारिक समापन किया जाता है. लेकिन संविधान में ऐसा नियम नहीं है कि स्थगित किए जाने के तुरंत बाद सत्र का सत्रावसान किया जाए, क्योंकि सत्र के सत्रावसान के लिए कोई समयसीमा तय नहीं है. सत्रावसान न होना भी असंवैधानिक या गैर-कानूनी नहीं है, लेकिन सरकार जरूरत और परिस्थितियों के अनुसार सत्रावसान को रोककर रख सकती है.

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संसद सत्र को कब तक स्थगित रखा जा सकता है?

संविधान के अनुच्छेद 85 (1) के अनुसार, संसद के 2 सत्रों के बीच 6 महीने से ज्यादा का अंतर नहीं होना चाहिए. यानी कोई सत्र 6 महीने तक स्थगित रह सकता है, लेकिन 6 महीने से ज्यादा समय तक स्थगित नहीं रहना चाहिए तो व्यावहारिक रूप से संसद सत्र का सत्रावसान 6 महीने पूरे से होने से पहले किया जाए तो बेहतर होगा, क्योंकि फिर दूसरा सदन बुलाया जाना है.

क्या स्थगित सत्र को वापस बुलाया जा सकता है?

हां, अनिश्चितकाल के लिए स्थगित सत्र को वापस बुलाया जा सकता है, लेकिन तब जब सत्र का सत्रावसान न हुआ है. वहीं सत्र को वापस बुलाने के लिए सरकार के नोटिफिकेशन या राष्ट्रपति के नए आदेश की जरूरत नहीं होती. अगर सत्रावसान नहीं हुआ है तो 2 दिन का नोटिस देकर स्थगित सत्र को वापस बुलाया जा सकता है.

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सत्र स्थगित होने पर लंबित विधेयकों का क्या होता?

संसद सत्र के स्थगित होने पर लंबित विधेयकों, प्रस्तावों या नोटिसों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि वे वे लंबित ही रहते हैं. वहीं जब सत्र शुरू होता है तो उन्हें वहीं से आगे बढ़ाया जाता है, जहां से उन्हें रोका गया था. वहीं सत्रावसान होने पर विधेयक तो लंबित रहते हैं, लेकिन नोटिस खत्म हो जाते हैं.

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संसद सत्र का सत्रावसान कब-कब रोका गया?

बता दें कि पहली बार संसद सत्र का सत्रावसान नहीं रोका गया है, बल्कि पहले भी कई बार संसद सत्र का सत्रावसान नहीं किया गया है. 1963 में 41 दिन तक संसद सत्र का सत्रावसान नहीं हुआ था. 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन, 2006 में 49 दिन, 2013 में 49 दिन, 2015 में 28 दिन तक संसद सत्र का सत्रावसान नहीं किया गया था.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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