पुलिस बॉन्ड क्या हैं और कितने प्रकार के होते हैं, बॉन्ड का उल्लंघन हो या न भरें तो क्या होगा? जानें नियम और शर्तें

हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए शख्स को पुलिस बॉन्ड भरवाकर रिहा करती है. 4 प्रकार के बॉन्ड भरवाए जाते हैं और अगर भरने से मना किया जाए या बॉन्ड तोड़ दिया जाए तो कुछ परिणाम भुगतने होंगे. आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं…

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अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को बॉन्ड भरवाकर रिहा किया जाएगा. (Credit-ANI/AI)

दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नेता अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरव दास के हिरासत में लिया था और पीस बॉन्ड भरवाकर रिहा कर दिया था. अब दिल्ली हाईकोर्ट ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को पीस बॉन्ड भरने को कहा है. हालांकि नेहा बोरा ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के 10000 रुपये के पीस बॉन्ड वाले नोटिस के खिलाफ याचिका दायर की थी, जो दिल्ली हाई कोर्ट ने रद्द कर दी और बॉन्ड भरने का आदेश दिया, लेकिन नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड साइन करने से इनकार कर दिया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि पुलिस बॉन्ड क्या होते हैं? कितने प्रकार के होते हैं और यह क्यों भरवाएं जाते हैं? अगर पुलिस बॉन्ड न भरे जाएं या भरने के बाद इनका उल्लंघन किया जाए या आरोपी और बॉन्ड भरने वाला फरार हो जाए तो क्या अंजाम भुगतना होगा?

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कितने प्रकार के होते हैं पुलिस बॉन्ड?

बता दें कि पुलिस बॉन्ड एक प्रकार का लिखित में किया गया समझौता है, जिसे साइन कराने के बाद हिरासत में लिए या गिरफ्तार किए गए शख्स को कुछ शर्तों के साथ अस्थायी तौर पर रिहा किया जाता है. आमतौर पर पुलिस 2 प्रकार के पर्सनल और श्योरिटी बॉन्ड भरवाती थी. उद्देध्य के आधार पर 2 प्रकार के अपीयरेंस और पीस बॉन्ड भरवाए जाते हैं. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 9 के तहत मजिस्ट्रेट बॉन्ड भरवाने का आदेश देता है. वहीं बॉन्ड भरकर गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया शख्स वादा करता है कि जब भी पुलिस या कोर्ट उसे बुलाएगी, वह समय गंवाए बिना पेश होगा. पुलिस बॉन्ड बिना किसी फीस के जारी किए जाते हैं और भरवाए जाते हैं. इसके तहत सबूतों से छेड़छाड़ न करना, गवाहों को न डराना और देश छोड़कर न जाना जैसी शर्तें मनवाई जाती हैं.

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क्या होते हैं पर्सनल और श्योरिटी बॉन्ड?

पर्सनल बॉन्ड में शख्स 10000 या 20000 रुपये भरता है और लिखित रूप में वादा करता है कि वह बुलाए जाने पर पुलिस या कोर्ट के सामने पेश होगा. इस बॉन्ड के भरने के लिए तीसरे शख्स की जरूरत नहीं होती. बहुत छोटा या जमानती या नो क्रिमिनल रिकॉर्ड या आर्थिक रूप से कमजोर शख्स से पर्सनल बॉन्ड भरवाया जाता है और इसे भरने के बाद अगर उल्लंघन किया जाए तो बॉन्ड में लिखी राशि वसूली जाती है. श्योरिटी बॉन्ड में आरोपी की गारंटी तीसरा शख्स लेता है कि बुलाए जाने पर वह कोर्ट या पुलिस के सामने पेश होगा. आरोपी के भागने की आशंका से यह बॉन्ड भरवाया जाता है और अगर इसका उल्लंघन हो तो जमानतदार को रकम चुकानी होगी, जेल जाना होगा या उसकी प्रॉपर्टी की कुर्की हो सकती है.

क्या होते हैं अपीयरेंस और पीस बॉन्ड?

पुलिस गिरफ्तार/हिरासत में लिए गए शख्स से हाजिरी बॉन्ड भरवाती है, जो पुलिस स्टेशन में जांच के दौरान या कोर्ट में सुनवाई के दौरान उपस्थिति दर्ज कराने के लिए भरवाया जाता है. इसे भरने के बाद शख्स पेश होने के लिए बाउंड हो जाता है. वहीं पीस बॉन्ड तब भरवाया जाता है, जब किसी शख्स के कारण किसी इलाके की शांति भंग होने का अंदेशा हो. एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने यह बॉन्ड भरवाया जाता है. इसका मकसद शख्स से शांति बनाए रखने का वादा लेना होता है. अपराध या लड़ाई-झगड़े को होने से पहले रोकना है. यह बॉन्ड एक साल के लिए ही भरा जाता है. चुनाव या विरोध प्रदर्शन के दौरान या विवाद के चलते माहौल बिगड़ने पर यह बॉन्ड भरवाया जाता है.

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बॉन्ड भरने से मना करने पर क्या होगा?

अगर बॉन्ड भरने से मना किया जाए तो शख्स को गिरफ्तार किया जा सकता है या उसे हिरासत/गिरफ्तारी से रिहा करने से इनकार किया जा सकता है. फिर पुलिस उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करेगी, जहां वे उसे न्यायिक हिरासत में भेजा जा सकता है. वहीं बॉन्ड न भरने पर शख्स को तब तक हिरासत में रखा जा सकता है, जब तक बॉन्ड की अवधि खत्म न हो जाए या वह बॉन्ड न भर दे.

बॉन्ड का उल्लंघन हो तो क्या होगा?

अगर पुलिस बॉन्ड भरने के बाद शख्स फरार हो जाए तो उल्लंघन करने वाले पर FIR हो सकती है या वसूली की जा सकती है या उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जा सकता है. अगर शख्स बुलाए जाने पर कोर्ट या थाने में पेश न हो तो उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो सकता है. BNSS/BNS की धाराआं के तहत केस दर्ज करके जेल की सजा दी जा सकती है या जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं बॉन्ड तोड़ने वाले का रिकॉर्ड खराब हो जाता है और फिर भविष्य में ऐसे किसी मामले में उसे जमानत मिलनी मुश्किल हो जाएगी.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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