अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिडटर्म चुनाव होंगे, जिसके लिए इस बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही मतदान कर दिया है. पिछली बार पोस्टल वोट डालने के लिए कारण उनकी आलोचना हुई थी, लेकिन इस बार उन्होंने पोलिंग बूथ पर जाकर मतदान किया. वे पत्नी मेलानिया के साथ फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी सुपरिंटेंडेंट ऑफिस में बने पोलिंग बूथ पर पहुंचे और वोट डाला. अमेरिका का पॉलिटिकल सिस्टम दुनिया का सबसे रोमांचक लेकिन मुश्किल सिस्टम है. इस देश में हर 4 साल में राष्ट्रपति चुनाव होते हैं और राष्ट्रपति के 4 साल के कार्यकाल के बीच में यानी पहले 2 साल के बाद मिडटर्म चुनाव होते हैं, जिन्हें आम चुनाव भी का जाता है. यानी इस चुनाव में अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के सदस्य और पदाधिकारी चुने जाते हैं.
मिडटर्म चुनाव क्यों कराए जाते हैं?
मिडटर्म चुनाव को अमेरिका का लिटमस टेस्ट कहते हैं, जिसमें जनता राष्ट्रपति के 2 साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड देती है कि सरकार ने 2 साल कैसा काम किया. इस चुनाव से तय होता है कि व्हाइट हाउस की ताकत पर अंकुश लगेगा या और ज्यादा ताकत मिलेगी. इन चुनाव में अमेरिका के सभी राज्यों में गवर्नर भी चुने जाते हैं. हालांकि वे संसद सदस्य नहीं होते, लेकिन गवर्नर राज्यों में कानूनों को लागू करने के लिए प्रस्ताव तैयार करके संसद सदस्यों को देते हैं, जिन्हें संसद में पेश करके पास कराया जाता है. अमेरिका में दक्षिणपंथी पार्टी रिपब्लिकन और वामपंथी दल डेमोक्रेटिक 2 बड़ी पार्टियां हैं. डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन के लिए मिडटर्म चुनाव’करो या मरो’ जैसे हैं, क्योंकि अमेरिका का इतिहास है कि सत्ताधारी दल मिडटर्म चुनाव हार जाता है.
मिडटर्म चुनाव के मायने क्या हैं?
अमेरिका की संसद (कांग्रेस) के 2 सदन होते हैं. एक निचला सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) जिसमें 435 सीटों होती हैं और इसके सदस्यों का कार्यकाल 2 साल का होता है. दूसरा उच्च सदन यानी सीनेट जिसके 100 सदस्य होते हैं और इनमें से एक तिहाई यानी 35 सीटों पर ही चुनाव होता है, जिनका कार्यकाल 6 साल का होता है. संसद सदस्यों के अलावा राज्यों के गवर्नर (राज्यपाल), राज्य विधानसभाओं, मेयर और अन्य स्थानीय पदाधिकारी भी मिडटर्म चुनाव में चुने जाते हैं. इन चुनाव के जरिए सत्ता का संतुलन बदला जा सकता है. हालांकि हारने के बाद भी राष्ट्रपति नहीं बदलते, लेकिन अगर जनता राष्ट्रपति की नीतियों से वे संतुष्ट नहीं हो तो वह मिडटर्म चुनाव में बहुमत देकर विपक्षी दल को संसद के दोनों सदनों की कमान सौंप सकती है.
मिडटर्म चुनाव का इतिहास क्या है?
अमेरिकी की राजनीति में मिडटर्म चुनाव को अभिशाप माना जाता है, क्योंकि इन चुनाव में व्हाइट हाउस में राज कर रही सत्ताधारी पार्टी हारती है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद का इतिहास देखें 20 में से 18 बार सत्ताधारी दल को मिडटर्म चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. 2010 में बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति थे और उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी को मिडटर्म चुनाव में भारी हार हुई थी. क्योंकि उनकी पार्टी को 63 सीटें गंवानी पड़ी थीं. 2006 में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश थे और उनकी रिपब्लिकन पार्टी भी मिडटर्म चुनाव हारी थी. इराक युद्ध के कारण बुश सरकार को झटका लगा और डेमोक्रेट्स ने संसद पर कब्जा कर लिया था. 2018 में मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी ने 40 सीटें और निचला सदन खो दिया था, लेकिन उच्च सदन में बहुमत बरकरार रखा था.
क्या किसी राष्ट्रपति ने मिडटर्म चुनाव जीता?
अमेरिका के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो 1934 में फ्रैंकलीन डी.रूजवेल्ट के कार्यकाल में महामंदी का दौर था तो ‘न्यू डील’ की बदौलत उन्होंने चुनाव में जीत हासिल की थी. 1998 में अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन थे और उस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था काफी मजबूत थी और महाभियोग के विरोध में उन्हें जनता की सहानुभूति मिली थी. 2002 में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश थे, जिन्हें 9/11 आतंकी हमले में कार्रवाई के चलते उन्हें बहुमत मिला था और वे चुनाव जीते थे.
ट्रंप मिडटर्म चुनाव हारे तो क्या होगा असर?
अगर डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी मिडटर्म चुनाव हार जाती है तो और विपक्षी दल डेमोक्रेटिक संसद के दोनों निचले या उच्च सदन में से किसी एक सदन पर कब्जा कर लेते हैं तो राष्ट्रपति ट्रंप के लिए कोई कानून पास कराना मुश्किल हो जाएगा, यानी वे नीतिगत रूप से पंगु हो जाएंगे. क्योंकि संसदीय कमेटियों की कमान विपक्ष के हाथ में आ जाएगी तो राष्ट्रपति, उनके मंत्रियों या परिवार के खिलाफ आर्थिक और राजनीतिक अनियमितताओं की जांच शुरू हो सकती है. राष्ट्रपति पर महाभियोग का खतरा मंडरा जाएगा. राष्ट्रपति जजों, राजदूतों या बड़े प्रशासनिक अधिकारियों को मनोनीत नहीं कर पाएंगे और उन्हें सीनेट की मंजूरी लेनी होगी. यानी एक तरह से सरकार का अगले 2 साल का कामकाज लगभग ठप हो जाएगा.
मिडटर्म चुनाव हार तो ट्रंप पद से हट जाएंगे?
अगर रिपब्लिकन पार्टी मिडटर्म चुनाव हार गई तो भी राष्ट्रपति ट्रंप को पद से नहीं हटाया जा सकता. क्योंकि अमेरिका के संविधान के अनुसार, मिडटर्म चुनाव के नतीजों का राष्ट्रपति के 4 साल के कार्यकाल की अवधि पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति अलग चुनावी प्रक्रिया के तहत चुने जाते हैं और मिडटर्म चुनाव से सिर्फ संसद के सदस्य, गवर्नर और अन्य पदाधिकारी चुने जाते हैं. राष्ट्रपति ट्रंप का कार्यकाल 20 जनवरी 2029 को खत्म होगा और उसके बाद ही राष्ट्रपति चुनाव होंगे. ऐसे में अगर रिपब्लिकन मिडटर्म चुनाव हार भी जाती है तो भी वे राष्ट्रपति पद पर बने रहेंगे.
संसद जीतकर डेमोक्रेटिक पद से हटा सकती?
अगर मिडटर्म चुनाव जीतकर बहुमत हासिल करके डेमोक्रेटिक पार्टी संसद पर काबिज हो जाती है तो भी डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटाना आसान नहीं होगा. क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति को कार्यकाल के बीच में पद से हटाने के लिए महाभियोग लाना होता है, जो अपने आप में बेहद जटिल प्रक्रिया है. महाभियोग प्रस्ताव पास कराने के लिए सीनेट में दो तिहाई बहुमत की जरूरत है. महाभियोग का प्रस्ताव निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) से बहुमत से पास हो सकता है, लेकिन उस प्रस्ताव का सीनेट में पास होना बेहद जरूरी है. प्रस्ताव को सीनेट में 2 तिहाई यानी 67% बहुमत मिलेगा, तभी उसे पास माना जाएगा और राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकेगा, लेकिन सीनेट में यह बहुमत हासिल करना मुश्किल है. कुल मिलाकर मिडटर्म चुनाव हारकर ट्रंप सरकार राजनीतिक और कानूनी तौर पर कमजोर पड़ जाएगी, लेकिन सरकार नहीं गिरेगी और न ट्रंप पद से हटाए जा सकेंगे.