PM मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और फर्जी पोस्ट मामले में FIR दर्ज होने के बाद मेटा (Meta) का पहला बयान सामने आया है. हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस द्वारा केस दर्ज किए जाने पर कंपनी ने अपनी स्थिति साफ की है. मेटा के प्रवक्ता ने कहा है कि वे इस पूरे मामले को लेकर संबंधित जांच एजेंसियों के लगातार संपर्क में हैं. कंपनी ने भरोसा दिया है कि वे मामले को सुलझाने के लिए अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं. दरअसल, हैदराबाद पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास और करीब 20 फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
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क्या है FIR का पूरा मामला?
यह विवाद सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान का है. आरोप है कि इस दौरान सोशल मीडिया पर PM मोदी की एडिट की गई आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो शेयर किए गए थे. भाजपा के सोशल मीडिया पदाधिकारियों ने इसकी शिकायत हैदराबाद साइबर क्राइम स्टेशन में दर्ज कराई थी. शिकायत में कहा गया कि ये पोस्ट भारत की संप्रभुता और कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक हैं. इसके बाद पुलिस ने आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की. अब पुलिस इन फर्जी पोस्ट को फैलाने वाले सोशल मीडिया खातों की जांच कर रही है.
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सरकार ने भी मांगा Meta से जवाब
इस बीच केंद्र सरकार ने भी मेटा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है. सरकार ने पीएम मोदी की फेसबुक पोस्ट पर अस्थाई रोक लगाने के मामले में कंपनी से तकनीकी और नीतिगत स्तर पर विस्तृत जवाब मांगा है. आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार सीधे कंपनी के सामने अपनी चिंताएं रखना चाहती है. अगले सात से 10 दिनों में अधिकारियों की बैठक हो सकती है. सरकार जानना चाहती है कि आखिर किन हालात में यह रोक लगाई गई थी.
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