पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) के रावलकोट में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सेना ने फायरिंग कर दी जिससे 16 लोगों की मौत हो गई है. मामला उस वक्त का है जब पाकिस्तानी सेना के जवानों और रेंजरों ने शहर के ईदगाह मैदान में एकत्र हुए हजारों निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दीं. सस्ता आटा, चावल, बिजली और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर आम नागरिकों की तरफ से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन शुरू हुआ लेकिन यह प्रदर्शन आम लोगों के लिए मौत का प्रदर्शन बन गया.
रावलकोट में 60,000 से 70,000 लोग एकत्र हुए थे जब पाकिस्तानी सेना ने बिना किसी चेतावनी के भीड़ पर गोलीबारी शुरू कर दी. जो पुरुष, महिलाएं और युवा आर्थिक तंगी के खिलाफ आवाज उठाने आए थे, उन्होंने अचानक खुद को अपनी जान बचाने के लिए भागते हुए देखा जा सकता है. इसके बाद पूरे रावलकोट से जो तस्वीर सामने आई है वह दिल दहलाने वाली है. खून से सनी सड़कें, खून से लथपथ खेत और अपनो की तलाश कर रहे हताश परिवार.
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पाकिस्तानी सेना के जवानों और रेंजरों द्वारा निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर एके-47 राइफलों से गोलीबारी के बाद कम से कम 16 नागरिक मारे गए और 37 से अधिक अन्य घायल हो गए. शुक्रवार से पीओजेके में विरोध प्रदर्शनों पर चल रही कार्रवाई में 53 नागरिकों की जान चली गई है. आपको बता दे कि पाक सेना की तरफ से किये गए गोलीबारी में हर ऐसा परिवार है जिसने एक पिता, एक बेटा, एक भाई, एक बेटी या एक दोस्त को खो दिया है.
हत्याओं से पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है. खाई गाला गांव में, निवासियों ने बाजार बंद कर दिए और हिंसा के खिलाफ मार्च निकाला. मारे गए लोगों के लिए न्याय की मांग करते हुए महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग नागरिक प्रदर्शन में शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने एक नारा लगाया जो पूरे पीओजेके में रैली का नारा बन गया, ” ये जो देशगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है” (यह आतंकवाद वर्दीधारी लोगों द्वारा चलाया जा रहा है).
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खून-खराबे के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने अपना आंदोलन छोड़ने से इनकार कर दिया है. आर्थिक राहत और राजनीतिक अधिकारों के लिए अपना संघर्ष जारी रखने के लिए हजारों लोग रावलकोट में एकत्र हैं. गोलीबारी के बाद भीड़ को संबोधित करते हुए.
आंदोलन के नेता सरदार अमन खान ने घोषणा की कि संघर्ष निर्णायक चरण में प्रवेश कर गया है और कसम खाई है कि लोगों की जान जाने के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा. पीओजेके की सड़कों पर लोग हथियार नहीं ले जा रहे हैं; वे किफायती भोजन, सस्ती बिजली और सम्मानजनक जीवन की मांग कर रहे हैं. फिर भी उन्हें जो प्रतिक्रिया मिली है वह गोलियों की है.
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