राजस्थान के प्रमुख टेक्सटाइल हब सांगानेर (जयपुर) और भीलवाड़ा इस समय गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं. एलपीजी गैस की सप्लाई में रुकावट आने की वजह से यहां की सैकड़ों प्रोसेसिंग यूनिट्स का कामकाज लगभग ठप हो गया है. इसका सीधा असर लाखों मजदूरों और पूरे टेक्सटाइल सप्लाई चेन पर पड़ रहा है. जानकारी के मुताबिक, बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से कमर्शियल एलपीजी गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. टेक्सटाइल प्रोसेसिंग में गैस का इस्तेमाल बेहद जरूरी होता है. कपड़े की प्रिंटिंग के बाद उसे सुखाने और रंग को पक्का करने के लिए एलपीजी की मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है. गैस की कमी होते ही ये मशीनें बंद हो गईं, जिससे प्रोडक्शन पूरी तरह रुक गया है.
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प्रिंटिंग फैक्ट्रियों में पसरा सन्नाटा
सांगानेर की प्रिंटिंग फैक्ट्रियों में कुछ दिन पहले तक रोजाना सैकड़ों मीटर कपड़ा तैयार होकर देश-विदेश भेजा जाता था, लेकिन अब वहां सन्नाटा पसरा है. फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि अगर अगले 2-3 दिनों में गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरन अपनी यूनिट्स बंद करनी पड़ेंगी. भीलवाड़ा और सांगानेर में गैस की भारी खपत होती है. एक प्रोसेसिंग यूनिट को रोजाना करीब 500 किलो एलपीजी की जरूरत होती है. भीलवाड़ा में कुल मिलाकर रोजाना 20 से 25 टन गैस की मांग है, जबकि सांगानेर में 10 से 15 टन गैस की जरूरत पड़ती है. सप्लाई रुकने से अब यह पूरा सिस्टम चरमरा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो राजस्थान का टेक्सटाइल उद्योग भारी आर्थिक नुकसान झेल सकता है. साथ ही लाखों परिवारों की आजीविका पर भी गहरा संकट आ सकता है.
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मुश्किल में फंसे मजदूर
इस संकट का सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर पड़ा है. अनुमान है कि 1.5 से 2 लाख मजदूर इस स्थिति से प्रभावित हुए हैं. कई फैक्ट्री मालिक पिछले कुछ दिनों से मजदूरों को एडवांस देकर रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अब हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं. मजदूरों को साफ कहा गया है कि अगर जल्द गैस सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो उन्हें अपने-अपने घर लौटना पड़ेगा. यहां काम करने वाले मजदूर सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से भी आते हैं. ऐसे में उनके सामने रोजगार और खाने-पीने तक का संकट खड़ा हो गया है. इसका असर सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है. टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़ी करीब 1000 से ज्यादा सहायक इकाईयां भी प्रभावित हो गई हैं. बुनाई, धागा, ट्रांसपोर्ट और बाजार सभी पर इसका नेगेटिव असर देखने को मिल रहा है.
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