गाजियाबाद का लोनी इलाका प्रदूषण के मामले में दुनिया के तमाम शहरों को पीछे छोड़ते हुए सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. आईक्यूएयर की वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 के मुताबिक लोनी अब दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है, जहां पीएम 2.5 का औसत स्तर 112.5 दर्ज किया गया है. यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय मानकों से करीब 22 गुना ज्यादा है, जो इंसानी सेहत के लिए बेहद जानलेवा साबित हो रहा है. लोनी के साथ-साथ दुनिया के टॉप 10 प्रदूषित शहरों में भारत के पांच शहर शामिल हैं, जिनमें दिल्ली और गाजियाबाद की स्थिति भी काफी चिंताजनक बनी हुई है.
लोनी की जहरीली हवा और जर्जर बुनियादी ढांचा
लोनी की भौगोलिक स्थिति और वहां की टूटी हुई सड़कें प्रदूषण की समस्या को और भी भयावह बना रही हैं. यहां की सड़कों पर गहरे गड्ढे हैं और जब भी कोई वाहन वहां से गुजरता है, तो धूल का भारी गुबार उठता है जो हवा में मिलकर पीएम 10 और पीएम 2.5 के कणों को बढ़ा देता है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि सर्दियों के मौसम में हवा की गति धीमी होने के कारण यह जहरीली परत एक जगह जमा हो जाती है. इसके अलावा इलाके में चल रही अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिट और कचरा जलाने की घटनाएं भी हवा को लगातार जहरीला बना रही हैं.
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अवैध उद्योगों पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रदूषण के इस बढ़ते संकट को देखते हुए लोनी के विधायक नंद किशोर गुर्जर ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों की एक विशेष कमेटी बनाने की घोषणा की है. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली से आने वाला प्रदूषण लोनी की हवा को खराब कर रहा है और वहां संचालित होने वाली अवैध इंडस्ट्रीज इसका मुख्य कारण हैं. विधायक ने भरोसा दिलाया है कि आने वाले समय में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों और अवैध रूप से चल रहे उद्योगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन अब रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग और उत्सर्जन पर नियंत्रण पाने के लिए ठोस कदम उठाने की योजना बना रहा है.
बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर मंडराता खतरा
लोनी के निवासियों के लिए यह प्रदूषण अब केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं बल्कि रोज की मुसीबत बन चुका है. लोगों को लगातार गले में इंफेक्शन, आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह जहरीली हवा जानलेवा साबित हो रही है क्योंकि उनका दम घुटने लगा है. स्थानीय लोग लंबे समय से सड़कों की मरम्मत और अवैध फैक्ट्रियों को बंद करने की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें इस नारकीय जीवन और बीमारियों के घेरे से कुछ राहत मिल सके.