महाराष्ट्र के बाद अब कर्नाटक सरकार ने बच्चों की सेहत को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने एक नई एडवाइजरी जारी की है. इसके तहत स्कूलों और कॉलेजों के 50 मीटर के दायरे में ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले खाने-पीने की चीजों की बिक्री पर रोक लगा दी गई है. विभाग ने जुलाई महीने में 134 शैक्षणिक संस्थानों के आसपास जांच अभियान चलाया था. इस जांच के दौरान पाया गया कि कई दुकानें बच्चों को असुरक्षित और ज्यादा रिफाइंड खाना बेच रही थीं. इसके बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए यह एडवाइजरी जारी की है.

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नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश

सरकार ने सभी जिला अधिकारियों और फूड सेफ्टी अफसरों को इस आदेश को पूरे राज्य में सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए हैं. स्कूलों के पास स्थित सभी दुकानदारों को फूड सेफ्टी एक्ट 2006 के तहत लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है. नियमों का उल्लंघन करने पर दुकानदारों का लाइसेंस रद्द करने, सामान जब्त करने और कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है. इसके साथ ही अधिकारियों को नियमित रूप से जांच करने और आम लोगों व दुकानदारों के बीच जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है.

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पौष्टिक और संतुलित आहार पर जोर

एडवाइजरी में स्कूल मैनेजमेंट को निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों के खाने में साबुत अनाज, दालें, मोटे अनाज, दूध और ताजे फल शामिल करें. रिफाइंड ब्रेड और प्रोसेस्ड स्नैक से बच्चों का ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है, इसलिए इनकी जगह पौष्टिक खाना देने की सलाह दी गई है. भोजन को अधिक पौष्टिक बनाने के लिए सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार फोर्टिफाइड आटा, चावल और दूध का इस्तेमाल किया जा सकता है. स्कूलों को अपने परिसर में जंक फूड न बेचने और सही चेतावनी वाले बोर्ड लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं.

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