Karnataka Bus Fare Hike Proposal: कर्नाटक के सरकारी ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ने बढ़ते ऑपरेशनल खर्च और आर्थिक चुनौतियों का हवाला देते हुए सरकार से बस किराए में काफी बढ़ोतरी को मंजूरी देने की गुजारिश है. ट्रांसपोर्ट कंपनियों के प्रपोजल में बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (BMTC) की तरफ से किराए में 44 फीसदी और कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KSRTC) की तरफ से 33 फीसदी की बढ़ोतरी शामिल है.

क्यों हुई किराया बढ़ाने की मांग?

अधिकारियों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती लागत, कर्मचारियों की सैलरी में रिविजन, मेंटनेंस के खर्च और दूसरे ऑपरेशनल जरूरतों के कारण कॉर्पोरेशन पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है. ट्रांसपोर्ट कंपनियों की तरफ से बताई गई एक और बड़ी वजह राज्य सरकार की 'शक्ति स्कीम' का असर है, जिसके तहत पूरे कर्नाटक में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा मिलती है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें- BPSC 2026 का फाइनल रिजल्ट हुआ आउट, जानिए किसने किया टॉप

---विज्ञापन---

सरकार से गुजारिश

खबरों के मुताबिक, राज्य की तरफ से संचालित चारों ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ने टिकट की कीमतों में बदलाव के अनुरोध के साथ सरकार से संपर्क किया है. बेंगलुरु में पब्लिक बस सर्विस चलाने वाली BMTC ने सबसे ज्यादा बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है, जबकि KSRTC ने अपनी इंटरसिटी सर्विस के लिए कम लेकिन अहम बदलाव की गुजारिश की है.

---विज्ञापन---

सीएम ने दिया जवाब

सीएम डीके शिवकुमार ने पुष्टि की कि उन्हें प्रस्ताव मिल गए हैं और अभी उनकी जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि कोई भी आखिरी फैसला लेने से पहले एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है. उनके मुताबिक, अधिकारियों को ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की आर्थिक स्थिरता और यात्रियों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सस्ता बनाए रखने की जरूरत के बीच संतुलन बनाना होगा.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें- बहराइच से बारबंकी तक 4 लेन डिजिटल हाईवे का काम शुरू, डेढ़ घंटे में पूरा होगा लखनऊ तक का सफर!

---विज्ञापन---

यात्रियों की हितों का ध्यान

सीएम शिवकुमार ने ईंधन से जुड़े खर्चों को लेकर भी चिंता जताई और जोर दिया कि कोई भी फैसला लेते समय यात्रियों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि पहले किराए में बदलाव अक्सर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से जुड़े होते थे, लेकिन सरकार कोई भी कदम उठाने से पहले मौजूदा स्थिति की सावधानी के साथ समीक्षा करेगी.

अभी सरकार ने नहीं लिया फैसला

ट्रांसपोर्ट अधिकारियों का तर्क है कि एडिशनल रेवेन्यू के बिना सर्विस बनाए रखना, कर्मचारियों को वेतन देना और ईंधन का खर्च उठाना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान से पब्लिक ट्रांसपोर्ट ऑपरेशन की लॉन्ग टर्म वायबिलिटी पर असर पड़ सकता है. राज्य सरकार ने अभी तक ये ऐलान नहीं किया है कि किराए में प्रस्तावित बदलावों को मंजूरी दी जाएगी या अंतिम फैसला कब तक आने की उम्मीद है.