जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में नया अपडेट आया है, जिसने सियासी और कानूनी गलियारों में खलबली मचा दी है. दरअसल, जस्टिस यशवंत वर्मा के कैश कांड की जांच पूरी हो चुकी है और जांच समिति आज लोकसभा सत्र में जांच रिपोर्ट पेश करेगी. जस्टिस पर लगे आरोपों की जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसके आधार पर आज लोकसभा में बड़ा फैसला आ सकता है. जस्टिस के सरकारी आवास पर करोड़ों के जले हुए नोट बरामद होने के बाद 200 से ज्यादा सांसदों ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है. इसी कड़ी में आज जांच रिपोर्ट आने के बाद लोकसभा में मामले पर चर्चा-बहस होगी और फैसला सुनाया जाएगा.
जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा, पेंशन मिलेगी या नहीं? क्या कहते हैं नियम
लोकसभा सेक्रेटरी सदन में जांच रिपोर्ट पेश करेंगे
बता दें कि जनरल जजेज (इंक्वायरी) एक्ट 1968 की धारा 4 (3) तथा जजेज (इंक्वायरी) रूल्स 1969 के नियम 9-10 के तहत लोकसभा सेक्रेटरी जांच रिपोर्ट को सदन में पेश करेंगे. इस रिपोर्ट के भाग-1 में हिंदी और भाग-2 में अंग्रेजी में डिटेल होगी. रिपोर्ट के साथ मौखिक और कागजी सबूतों भी पेश किए जाएंगे. इस रिपोर्ट के पेश होने के बाद उन्हें जस्टिस पद से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. उनके खिलाफ पेश महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा आगे बढ़ सकती है. अगर संसद में महाभियोग प्रस्ताव पारित हो गया तो यशवंत वर्मा को तुरंत प्रभाव से जस्टिस पद से हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है.
स्टोर रूम में लगी आग में जले थे करोड़ों के नोट
मार्च 2025 नई दिल्ली के तुगलक क्रीसेंट स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में बने स्टोर रूम में आग लग गई थी. हादसे की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस को स्टोर रूम से आधे जले नोट मिले. हादसे के समय जस्टिस यशवंत वर्मा और उनकी पत्नी मध्य प्रदेश में थे. घर से इतना कैश बरामद होने के बाद सवाल उठे तो जस्टिस को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया. वहीं जस्टिस ने आरोपों को सिरे से खारिज किया और उनकी उपस्थिति में उनके घर में कैश रखकर साजिश रचे जाने का आरोप लगाया. उन्होंने कैश उनका होने और स्टोर रूम उनके आवास में होने से इनकार किया.
राष्ट्रपति ने स्वीकार नहीं किया जस्टिस का इस्तीफा
जस्टिस यशवंत वर्मा के इलाहाबाद हाई कोर्ट में कामकाज करने की अनुमति नहीं थी, इसलिए उन्होंने 9 अप्रैल 2026 को जज के पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन राष्ट्रपति ने अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है. इसलिए उनका नाम अभी-भी इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों की लिस्ट में दर्ज है. इस बीच 200 से ज्यादा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को याचिका सौंपी और जस्टिस को पद से हटाने की मांग की. इस मांग पर लोकसभा स्पीकर ने 3 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया. जिसकी जांच पूरी हो गई है और यही जांच समिति आज लोकसभा में रिपोर्ट पेश करके जस्टिस के भविष्य का फैसला सुनिश्चित करेगी.
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